UP को मिला एक और एक्सप्रेसवे का तोहफा, गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए ₹3500 करोड़ मंजूर, जानें पूरा रूट
उत्तर प्रदेश, जो अब 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' के नाम से अपनी नई पहचान बना चुका ਹੈ, विकास की एक और नई छलांग लगाने के लिए तैयार है। केंद्र की मोदी और राज्य की योगी सरकार एक ऐसी महत्वाकांक्षी और stratégique महापरियोजना को हरी झंडी दी है, जो न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि बिहार और पश्चिम बंगाल की भी आर्थिक और सामाजिक तस्वीर को हमेशा के लिए बदल कर रख देगी। हम बात कर रहे गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (Gorakhpur-Siliguri Greenfield Expressway) की।
लगभग 519 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन का एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि एक आर्थिक गलियारा (Economic Corridor) होगा जो पूर्वी यूपी को सीधे बिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) के 'गेटवे' सिलीगुड़ी से जोड़ेगा। इस विशाल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) जैसे शुरुआती कार्यों के लिए 3500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट को मंजूरी दे दी गई है, जिससे इस प्रोजेक्ट पर काम तेज गति से आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है यह महापरियोजना? (गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे)
यह एक्सप्रेसवे भारतमाला परियोजना (Bharatmala Pariyojana) के तहत बनने वाला एक अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है।
- ग्रीनफील्ड का मतलब?: इसका मतलब है कि यह पूरी तरह से एक नए और सीधे रास्ते पर बनाया जाएगा, न कि किसी पुरानी सड़क को चौड़ा करके। इससे यात्रा का समय काफी कम हो जाता है और रास्ते में आने वाले शहरों को जाम से भी मुक्ति मिलती है।
- लंबाई और चौड़ाई: यह एक्सप्रेसवे लगभग 519 किलोमीटर लंबा होगा और इसे 6-लेन का बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में 8-लेन तक बढ़ाया जा सकेगा।
यह एक्सप्रेसवे कहाँ से गुजरेगा? (UP-बिहार-बंगाल का रूट)
यह एक्सप्रेसवे तीन राज्यों के दर्जनों जिलों के विकास की नई इबारत लिखेगा:
- उत्तर प्रदेश: एक्सप्रेसवे की शुरुआत गोरखपुर से होगी और यह देवरिया और कुशीनगर जिलों से होकर गुजरेगा।
- बिहार: यह बिहार में सबसे लंबी दूरी तय करेगा, जहां यह पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे कई महत्वपूर्ण जिलों को पार करेगा।
- पश्चिम बंगाल: बिहार के किशनगंज से निकलकर यह एक्सप्रेसवे सीधे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में जाकर समाप्त होगा।
क्यों है यह एक्सप्रेसवे एक 'गेम-चेंजर'? (इसके सबसे बड़े फायदे)
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण सिर्फ यात्रा को सुगम बनाना नहीं है, इसके दूरगामी और रणनीतिक फायदे हैं जो इसे एक 'गेम-चेंजर' बनाते हैं:
1. यात्रा के समय में क्रांतिकारी कमी:
- अभी गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक सड़क मार्ग से जाने में 12 से 14 घंटे का समय लगता है। इस एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद यह दूरी घटकर महज 6 से 7 घंटे रह जाएगी।
2. आर्थिक और औद्योगिक विकास को पंख:
- यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे बिहार और पश्चिम बंगाल के बाजारों से जोड़ देगा। इससे व्यापार, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स को अभूतपूर्व गति मिलेगी। इसके किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
3. पूर्वोत्तर भारत से सीधी कनेक्टिविटी:
- सिलीगुड़ी को 'पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार' कहा जाता है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, यूपी और बिहार से पूर्वोत्तर के राज्यों (जैसे सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश) तक पहुंचने का सबसे तेज और सबसे सुगम मार्ग बन जाएगा।
4. पर्यटन को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा:
- जो पर्यटक दार्जिलिंग, गंगटोक और पूर्वोत्तर की खूबसूरत वादियों में घूमना चाहते हैं, उनके लिए यह एक्सप्रेसवे एक वरदान साबित होगा। इससे क्षेत्र में पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलेगा।
5. रणनीतिक महत्व (Strategic Importance):
- यह एक्सप्रेसवे 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' (Siliguri Corridor) या 'चिकन नेक' (Chicken's Neck) के पास से गुजरेगा, जो कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह कॉरिडोर भारत को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। इस एक्सप्रेसवे से इस क्षेत्र में सेना और सैन्य साजो-सामान की आवाजाही बहुत तेज और आसान हो जाएगी।
फिलहाल, इस एक्सप्रेसवे के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप दिया जा रहा है और जल्द ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज की जाएगी। यह परियोजना न केवल तीन राज्यों के बीच की दूरी को कम करेगी, बल्कि उनके बीच विकास और समृद्धि के नए पुल का निर्माण भी करेगी।