UP Bureaucracy : 2004 बैच की चर्चित अफसर अनामिका सिंह ने अचानक क्यों लिया संन्यास? अंदर की बात
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉवर कॉरिडोर (गलियारों) में आज सुबह से ही एक ही नाम चर्चा में है अनामिका सिंह। आम तौर पर सरकारी नौकरी, वो भी आईएएस (IAS) जैसी प्रतिष्ठित कुर्सी को छोड़ने का फैसला कोई सपने में भी नहीं लेता। लेकिन 2004 बैच की इस तेज-तर्रार महिला अधिकारी ने 'वीआरएस' (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) मांगकर पूरे प्रशासन को चौंका दिया है।
कौन हैं अनामिका सिंह और क्यों है उनका कद इतना बड़ा?
अगर आप यूपी की ख़बरों पर नज़र रखते हैं, तो आपने अनामिका सिंह का नाम जरूर सुना होगा। वे 2004 बैच की अधिकारी हैं और अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। चाहे बेसिक शिक्षा विभाग हो या फिर महिला एवं बाल विकास, जहाँ भी उनकी पोस्टिंग रही, वहां काम में ढिलाई की गुंजाइश नहीं रही। उन्हें एक "परफॉर्मर ऑफिसर" माना जाता है।
हैरानी की सबसे बड़ी वजह यह है कि उनका रिटायरमेंट साल 2036 में होना था। यानी उनके पास काम करने, प्रमोशन पाने और सिस्टम को बदलने के लिए पूरे 11-12 साल बाकी थे। ऐसे में अचानक बीच रास्ते में 'फुल स्टॉप' लगाने का फैसला किसी के गले नहीं उतर रहा।
वजह क्या है? 'निजी' या कुछ और?
सरकारी कागजों में तो हर कोई वीआरएस (VRS) की वजह "निजी कारण" (Personal Reasons) ही लिखता है, और अनामिका सिंह ने भी शायद यही किया है। लेकिन दबी जुबान में अफ़सरशाही में कई तरह की बातें चल रही हैं:
- पारिवारिक दायित्व: कहा जा रहा है कि वे अपने परिवार को ज्यादा समय देना चाहती हैं, जो शायद इस बेहद व्यस्त नौकरी में मुमकिन नहीं हो पा रहा था।
- दबाव और तनाव: चर्चा यह भी है कि पिछले कुछ समय से वे अपने विभाग या काम के दबाव से खुश नहीं थीं। हालाँकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
- दूसरी राह: आजकल कई आईएएस अफ़सर कॉर्पोरेट जगत या सोशल वर्क की तरफ भी रुख कर रहे हैं, शायद उनका भी कोई ऐसा ही प्लान हो।
मंजूरी मिलने में लगेगा वक्त
ऐसा नहीं है कि उन्होंने इस्तीफा दिया और वो कल से घर बैठ जाएंगी। वीआरएस की एक प्रक्रिया होती है। राज्य सरकार को इस पर फैसला लेना होगा, जिसमें कुछ महीने लग सकते हैं। लेकिन यह तो तय है कि अनामिका सिंह ने मन बना लिया है।
यह खबर हम आम लोगों के लिए सिर्फ एक न्यूज़ हो सकती है, लेकिन यूपी के प्रशासनिक अमले के लिए यह एक बड़ा झटका है। जब एक अनुभवी और ईमानदार अफ़सर समय से पहले सिस्टम छोड़ता है, तो सवाल उठना लाजमी है कि आखिर "सब कुछ ठीक तो है ना?"
फिलहाल, नियुक्ति विभाग उनके आवेदन पर विचार कर रहा है। देखना होगा कि क्या सरकार उन्हें जाने देती है या फिर उन्हें मनाने की कोई कोशिश होती है।