Unknown Facts : जब प्रोड्यूसर ने कहा ये सूखा सा लड़का बनेगा डॉन? जानिए कैसे बची थी गैंग्स ऑफ वासेपुर

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News India Live, Digital Desk: आज 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' को हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है. इसके किरदार, डायलॉग्स और कहानी, सब कुछ लोगों के दिलों में बस चुका है. खासकर फैजल खान के रोल में नवाजुद्दीन सिद्दीकी को कोई कैसे भूल सकता है! लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था, जब यही फिल्म बनने से पहले ही बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी? और इसकी वजह कोई और नहीं, बल्कि खुद नवाजुद्दीन सिद्दीकी थे.

इस बात का खुलासा खुद फिल्म के डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में किया. उन्होंने बताया कि कैसे फिल्म के प्रोड्यूसर नवाजुद्दीन को फैजल खान के रोल में लेने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे.

प्रोड्यूसर्स को नहीं था नवाज पर भरोसा

अनुराग कश्यप ने बताया कि जब उन्होंने फिल्म के लिए कास्टिंग शुरू की, तो वह सरदार खान के बेटे फैजल खान के रोल के लिए नवाजुद्दीन सिद्दीकी को ही लेना चाहते थे. नवाज उस वक्त इंडस्ट्री में नए थे और कोई बड़ा नाम नहीं थे. जब प्रोड्यूसर्स को पता चला कि नवाज इस अहम किरदार को निभाने वाले हैं, तो वे चौंक गए.

प्रोड्यूसर्स का मानना था कि फैजल खान का किरदार एक गैंग के लीडर का है, जिसे दबंग और ताकतवर दिखना चाहिए. उन्होंने अनुराग से कहा, "ये कैसा दिखेगा फैजल खान? ये इतना दुबला-पतला सा लड़का, इसमें तो कोई पर्सनालिटी ही नहीं है. इसे देखकर कोई डरेगा कैसे?" प्रोड्यूसर्स को डर था कि एक कमजोर दिखने वाले एक्टर की वजह से उनकी फिल्म फ्लॉप हो जाएगी.

जब अनुराग ने फिल्म छोड़ने की दे दी धमकी

प्रोड्यूसर्स का दबाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने अनुराग से एक्टर बदलने को कह दिया. बात यहां तक पहुंच गई कि फिल्म को बंद करने तक की नौबत आ गई. लेकिन अनुराग कश्यप अपनी बात पर अड़े रहे. उन्हें नवाज की काबिलियत पर पूरा भरोसा था.

अनुराग ने इंटरव्यू में बताया, "मैंने उनसे साफ-साफ कह दिया कि अगर फैजल खान का रोल नवाज नहीं करेगा, तो यह फिल्म नहीं बनेगी. मैं यह फिल्म छोड़ दूंगा." अनुराग के इस कड़े रुख के बाद प्रोड्यूसर्स को झुकना पड़ा और वे नवाज को कास्ट करने के लिए मान तो गए, लेकिन उनका शक बना रहा.

आखिरकार, जब फिल्म रिलीज हुई, तो नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी एक्टिंग से इतिहास रच दिया. फैजल खान का किरदार हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में से एक बन गया. उन्होंने साबित कर दिया कि एक एक्टर को दमदार दिखने के लिए बॉडी की नहीं, बल्कि दमदार एक्टिंग की ज़रूरत होती है. आज वही प्रोड्यूसर्स अनुराग कश्यप के फैसले की तारीफ करते नहीं थकते. यह किस्सा बताता है कि एक डायरेक्टर का अपनी सोच पर भरोसा करना कितना ज़रूरी होता है.