उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। संभावना है कि 26 जनवरी से UCC लागू हो जाएगा। इसके तहत विवाह, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को एकसमान नियमों के तहत लाया जाएगा।
UCC के तहत प्रमुख बदलाव
1. लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
लिव-इन रिलेशनशिप को अब शादी की तरह ही कानूनी मान्यता दी जाएगी। इसके लिए:
- रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: लिव-इन पार्टनर्स को अपनी स्थिति कानूनी रूप से दर्ज करानी होगी।
- समाप्ति प्रक्रिया: लिव-इन रिलेशनशिप समाप्त होने पर भी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होगी।
2. वसीयत और उत्तराधिकार मामलों में पारदर्शिता
- वसीयत और उत्तराधिकार मामलों में गवाहों की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी।
- कानूनी उत्तराधिकारियों की घोषणा और वसीयत को प्रमाणित करने के लिए फोटो और आधार डिटेल शामिल की जाएंगी।
3. सभी कानूनी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण
- सभी रजिस्ट्रेशन के लिए आधार डिटेल अनिवार्य होगी।
- विवाह, तलाक, और उत्तराधिकार जैसे मामलों की जानकारी डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध होगी।
UCC पोर्टल की खासियत
उत्तराखंड सरकार ने UCC के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल तैयार किया है। इसके संचालन और उपयोग को समझाने के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पोर्टल के उपयोगकर्ता:
- नागरिक: पोर्टल पर अपनी कानूनी आवश्यकताओं के लिए लॉग इन कर सकते हैं।
- सेवा केंद्र कर्मचारी: नागरिकों की मदद के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी।
- अधिकारी: सभी रजिस्ट्रेशन और प्रक्रियाओं को सत्यापित और प्रबंधित करेंगे।
पोर्टल पर उपलब्ध सेवाएं:
- शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन।
- लिव-इन रिलेशनशिप और टर्मिनेशन का रजिस्ट्रेशन।
- बिना वसीयत के उत्तराधिकार और कानूनी उत्तराधिकारियों की घोषणा।
- वसीयत उत्तराधिकार और अपील की प्रक्रिया।
- जानकारी और शिकायत दर्ज करने की सुविधा।
प्रशिक्षण और कार्यान्वयन प्रक्रिया
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, UCC पोर्टल के संचालन के लिए 14 अधिकारियों को तीन उप-विभागीय मजिस्ट्रेटों (SDM) की उपस्थिति में प्रशिक्षण दिया गया।
- यह प्रशिक्षण 20 जनवरी तक चलेगा।
- सभी लॉगिन और प्रक्रिया को समझने के लिए आधार डिटेल अनिवार्य है।
UCC लागू होने के लाभ
- समान कानून: हर व्यक्ति के लिए एक समान कानूनी ढांचा, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या पृष्ठभूमि का हो।
- डिजिटल पारदर्शिता: सभी कानूनी प्रक्रियाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा।
- सरल प्रक्रिया: नागरिकों को विवाह, तलाक, और उत्तराधिकार जैसे मामलों में आसान और तेज़ समाधान मिलेगा।
- महिला सशक्तिकरण: विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन से महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित होंगे।