समझिए, देश का उपराष्ट्रपति कौन और कैसे चुनता है? इतनी आसान भाषा में कि आप किसी को भी समझा देंगे!
हम सब राष्ट्रपति के बारे में तो अक्सर सुनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश के उपराष्ट्रपति (Vice-President) कैसे चुने जाते हैं? यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण पद है क्योंकि उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा के सभापति होते हैं।
यह चुनाव राष्ट्रपति चुनाव से थोड़ा अलग होता है। चलिए, आज मैं आपको बहुत ही सरल भाषा में बताता हूँ कि इस चुनाव में कौन वोट डालता है और पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है।
कौन डालता है वोट?
उपराष्ट्रपति को चुनने के लिए एक खास समूह वोट डालता है, जिसे 'निर्वाचक मंडल' या Electoral College कहते हैं। इस समूह में केवल संसद के सदस्य ही शामिल होते हैं:
- लोकसभा के सभी सांसद:इसमें वो सांसद भी शामिल हैं जिन्हें जनता सीधे चुनकर भेजती है और मनोनीत (nominated) सदस्य भी।
- राज्यसभा के सभी सांसद:इसमें भी चुने हुए और राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत, दोनों तरह के सदस्य वोट डालते हैं।
कुल मिलाकर, लोकसभा और राज्यसभा के सभी 788 सदस्य मिलकर उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।एक ज़रूरी बात यह है कि इसमें राज्यों के विधायक (MLA) वोट नहीं डालते, जैसा कि राष्ट्रपति चुनाव में होता है।
चुनाव की प्रक्रिया क्या है?
यह चुनाव सीधे 'मेरा वाला उम्मीदवार जीत गया' जैसा नहीं होता। इसमें एक खास तरीके से वोटिंग होती है जिसे 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली' (Proportional Representation) कहते हैं।
- वोट नहीं, प्राथमिकता (Preference) देनी होती है: वोट देने वाले सांसद किसी एक उम्मीदवार को नहीं चुनते, बल्कि अपनी पसंद के हिसाब से उम्मीदवारों को रैंक देते हैं। जैसे- पहली पसंद ये, दूसरी पसंद ये, और इसी तरह आगे भी।
- गुप्त मतदान:यह पूरी प्रक्रिया गुप्त मतदान (Secret Ballot) के ज़रिए होती है, मतलब किसने किसको वोट दिया, यह पता नहीं चलता।
- जीत के लिए चाहिए आधा कोटा:जीतने के लिए उम्मीदवार को कुल वोटों के आधे से ज़्यादा का कोटा हासिल करना होता है। अगर पहली पसंद के वोटों से विजेता नहीं मिलता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है और उसके वोटों को दूसरी पसंद के आधार पर बाकी उम्मीदवारों में बाँट दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक किसी एक को जीत का कोटा नहीं मिल जाता।
कौन बन सकता है उपराष्ट्रपति?
इस पद के लिए चुनाव लड़ने की कुछ शर्तें हैं:
- वह भारत का नागरिक हो।
- उसकी उम्र 35 साल से ज़्यादा हो।
- वह राज्यसभा का सांसद चुने जाने की योग्यता रखता हो।
- वह किसी लाभ के पद पर न हो।
इसके अलावा, उम्मीदवार को कम से-कम 20 सांसदों का प्रस्तावक (Proposers) और 20 सांसदों का अनुमोदक (Seconders) के रूप में समर्थन हासिल करना होता है।
संक्षेप में, देश के उपराष्ट्रपति को हमारे द्वारा चुने गए सांसद ही चुनते हैं। यह एक अहम संवैधानिक प्रक्रिया है जो हमारे लोकतंत्र की गहराई को दर्शाती है।