Trump's big U-Turn: 24 घंटे पहले भारत को बताया था चीन का, अब मोदी को कह रहेमहान दोस्त
News India Live, Digital Desk: Trump's big U-Turn: राजनीति में कब क्या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. खासकर जब बात अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हो, तो बयानों का बदलना कोई नई बात नहीं है. हाल ही में उन्होंने एक ऐसा ही यू-टर्न लिया है, जिसने भारत-अमेरिका संबंधों पर नजर रखने वालों को चौंका दिया है.
24 घंटे में कैसे बदले ट्रंप के सुर
अभी एक दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट किया था. इसमें उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की एक तस्वीर साझा की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साथ दिख रहे थे. इस तस्वीर के साथ ट्रंप ने लिखा, “ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को सबसे गहरे, सबसे अंधकारमय चीन के हाथों खो दिया है. ईश्वर करे कि उनका भविष्य लंबा और समृद्ध हो!”
इस बयान के बाद भारत और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के और गहराने की आशंका जताई जाने लगी थी.
लेकिन 24 घंटे के भीतर ही ट्रंप अपने इस बयान से पलट गए. जब पत्रकारों ने उनसे भारत के साथ संबंधों को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने बिलकुल अलग ही राग अलापा. ट्रंप ने कहा, “मैं हमेशा प्रधानमंत्री मोदी का दोस्त रहूंगा. वह एक महान प्रधानमंत्री हैं.[5] भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत ही खास रिश्ता है और चिंता की कोई बात नहीं है.”
दोस्ती की बात, पर नाराजगी भी बरकरार
हालांकि, पीएम मोदी की तारीफों के पुल बांधते हुए भी ट्रंप अपनी नाराजगी जताना नहीं भूले. उन्होंने साफ किया कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना उन्हें पसंद नहीं आ रहा है. उन्होंने कहा, “मैं बस इस समय वह (पीएम मोदी) जो कर रहे हैं, उसे पसंद नहीं करता.” ट्रंप ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाया है.
ट्रंप ने अपने पुराने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका ने भारत को खो दिया है. उन्होंने कहा कि भारत के रूस से इतना तेल खरीदने से उन्हें बहुत निराशा हुई है.
क्यों अहम है ट्रंप का यह यू-टर्न?
डोनाल्ड ट्रंप का यह बदला हुआ बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर रिश्ते कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर टैरिफ काफी बढ़ा दिया है. ऐसे में पहले भारत के चीन और रूस के करीब जाने की बात कहना और फिर तुरंत पीएम मोदी को अपना दोस्त बताकर संबंधों को 'खास' बताना, ट्रंप की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोस्ती और नाराजगी साथ-साथ चलती हैं, और ट्रंप इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं.