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April 30 2026 11:33 am

सिग्नल की गड़बड़ी से थे परेशान? DMRC ने निकाला ऐसा समाधान जो बदल देगा आपका अनुभव

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दिल्ली में मेट्रो से सफर करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है, खासकर उनके लिए जो रोजाना रेड और येलो लाइन से यात्रा करते हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने अपनी इन दो सबसे पुरानी और व्यस्त लाइनों पर सफर को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए DMRC ने दुनिया की जानी-मानी कंपनी एल्सटॉम ट्रांसपोर्ट इंडिया लिमिटेड (ATIL) के साथ एक खास समझौता किया है, जिसका सीधा फायदा लाखों यात्रियों को मिलेगा।

क्यों पड़ी इस समझौते की जरूरत?

रेड लाइन (रिठाला-शहीद स्थल) और येलो लाइन (मिलेनियम सिटी सेंटर-समयपुर बादली) दिल्ली मेट्रो के सबसे पुराने कॉरिडोर में से हैं, जो क्रमशः 2002 और 2004 से चल रहे हैं। इतने सालों से लगातार चलने की वजह से इनके सिग्नलिंग सिस्टम में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही थी। अभी इन लाइनों पर 'डिस्टेंस टू गो' (DTG) नाम की तकनीक इस्तेमाल होती है।

क्या है यह नया समझौता?

DMRC के निदेशक (इंफ्रास्ट्रक्चर) मनुज सिंघल और एल्सटॉम के निदेशक (कमर्शियल) सचिन देवड़ा ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कॉन्ट्रैक्ट 6 साल के लिए है, जिसे बाद में 2 साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है।

इस साझेदारी का मुख्य मकसद है:

  • स्पेयर पार्ट्स की कमी को दूर करना: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिग्नलिंग सिस्टम के लिए जरूरी स्पेयर पार्ट्स हमेशा उपलब्ध रहें, ताकि किसी भी खराबी को तुरंत ठीक किया जा सके।
  • समस्या की जड़ तक पहुंचना: मौजूदा सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा, जिससे अगर कोई तकनीकी खराबी आती है, तो उसकी असली वजह का जल्दी और सटीक पता लगाया जा सकेगा।
  • मिलेगी एक्सपर्ट की मदद: एल्सटॉम अपने दुनियाभर के एक्सपर्ट्स के जरिए DMRC को लगातार तकनीकी मदद देगी, ताकि समस्याओं को सुलझाने में आसानी हो। इसके अलावा, सिस्टम की समय-समय पर जांच भी की जाएगी।

कुल मिलाकर, इस कदम का लक्ष्य इन दोनों महत्वपूर्ण लाइनों पर मेट्रो के संचालन को और ज्यादा कुशल और भरोसेमंद बनाना है, ताकि आपका सफर पहले से ज्यादा आरामदायक और बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके।