Classic Songs : लग जा गले के वो शब्द जो आज भी रूह को छू लेते हैं कौन थे राजा मेहंदी अली खान?
News India Live, Digital Desk: लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो..." साल 1964 की फिल्म 'वो कौन थी' का यह गीत आज भी जब कानों में पड़ता है, तो वक्त जैसे ठहर जाता है। लता मंगेशकर की मखमली आवाज और मदन मोहन के जादुई संगीत ने इसे अमर बना दिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन दर्द भरे और रूहानी शब्दों को किसने पिरोया था? वे थे महान गीतकार राजा मेहंदी अली खान। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके लिखे ये शब्द आने वाली कई पीढ़ियों के दिलों में धड़कते रहेंगे।
मदन मोहन और राजा मेहंदी: एक कालजयी जोड़ी
राजा मेहंदी अली खान और संगीतकार मदन मोहन की जोड़ी ने बॉलीवुड को कई नायाब तोहफे दिए हैं। 'वो कौन थी' के लिए जब राजा साहब ने 'लग जा गले' लिखा, तो मदन मोहन को एक ऐसी धुन की तलाश थी जो शब्दों की गहराई के साथ न्याय कर सके। दिलचस्प बात यह है कि इस गीत की धुन को फिल्म के निर्देशक राज खोसला ने पहले रिजेक्ट कर दिया था। लेकिन मदन मोहन और राजा साहब के विश्वास के कारण इसे फिल्म में रखा गया, और आज यह दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रेम गीतों में शुमार है।
सियालकोट से मुंबई तक का सफर
राजा मेहंदी अली खान का जन्म अविभाजित भारत के सियालकोट (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। वे केवल एक गीतकार नहीं, बल्कि एक कुशल कवि और लेखक भी थे। सआदत हसन मंटो के करीबी दोस्त रहे राजा साहब ने अपनी कलम से देशभक्ति और रोमांस, दोनों को बखूबी उकेरा। फिल्म 'शहीद' (1948) का प्रसिद्ध गीत 'वतन की राह में वतन के नौजवान शहीद हों' भी उन्हीं की कलम से निकला था।
सादगी में छिपा था शब्दों का जादू
राजा मेहंदी अली खान की खासियत थी कि वे बेहद जटिल भावनाओं को बहुत ही सरल शब्दों में बयां कर देते थे। उनके लिखे कुछ अन्य प्रसिद्ध गीत हैं:
'नैना बरसे रिमझिम-रिमझिम' (वो कौन थी)
'आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे' (अनपढ़)
'अगर मुझसे मोहब्बत है' (आपकी परछाइयां)
'तू जहाँ जहाँ चलेगा' (मेरा साया)
एक गुमनाम सितारा जिसका उजाला आज भी है
29 जुलाई 1966 को राजा मेहंदी अली खान ने दुनिया को अलविदा कह दिया। महज 38 साल की उम्र में उनका निधन संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। उन्होंने अपने छोटे से करियर में जो काम किया, वह आज भी फिल्म जगत के लिए एक मिसाल है। 'लग जा गले' आज भी यूट्यूब और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर सबसे ज्यादा सुना जाने वाला पुराना गाना है, जो राजा साहब की लेखनी की ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण है।