Bollywood Director: सलाखों के पीछे विक्रम भट्ट की वो खौफनाक रातें, जेल के अनुभव को याद कर छलका फिल्ममेकर का दर्द
News India Live, Digital Desk: बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक विक्रम भट्ट अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी पर्सनल जिंदगी और बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने जीवन के सबसे काले अध्याय यानी जेल में बिताए उन दिनों को याद किया है, जिसने उनकी रूह कंपा दी थी। एक भावुक नोट साझा करते हुए विक्रम भट्ट ने बताया कि कैसे सलाखों के पीछे बिताया गया एक-एक पल उन्हें मौत के करीब महसूस कराता था और उस वक्त केवल 'शक्ति' (देवी माँ) ही उनका एकमात्र सहारा थीं।
कालकोठरी का वो सन्नाटा और मौत का डर
विक्रम भट्ट ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जेल की दीवारें इंसान को अंदर से तोड़ देती हैं। उन्होंने लिखा कि जब वह जेल में थे, तो उन्हें हर पल यही डर सताता था कि कहीं उनका अंत इसी कालकोठरी में न हो जाए। वह दिन-रात बस एक ही प्रार्थना करते थे— "हे देवी मां, मैं यहाँ नहीं मरना चाहता।" उन्होंने बताया कि जेल के उस माहौल में इंसान अपनी सारी पहचान और अहंकार भूल जाता है, वहां केवल जीवित रहने की जंग होती है।
"ईश्वर से हुआ साक्षात्कार": भक्ति ने दिया सहारा
निर्देशक ने बताया कि जेल के दिनों ने उन्हें अध्यात्म के करीब ला दिया। जब दुनिया के सारे रास्ते बंद नजर आ रहे थे, तब उन्होंने ईश्वर की शरण ली। उन्होंने याद किया कि कैसे वह घंटों प्रार्थना करते थे और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने की कोशिश करते थे। विक्रम के मुताबिक, वह अनुभव उनके लिए एक 'पुनर्जन्म' जैसा था, जिसने उन्हें जीवन की असल कीमत समझाई।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भावुक पोस्ट
विक्रम भट्ट का यह नोट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उनके प्रशंसक और फिल्म इंडस्ट्री के साथी उनकी हिम्मत की दाद दे रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि एक सफल फिल्ममेकर का इस तरह अपनी कमजोरी और डर को दुनिया के सामने रखना वाकई बहादुरी का काम है। विक्रम ने अपनी बात खत्म करते हुए लिखा कि वह अब हर दिन को एक उपहार की तरह जीते हैं और उन अंधेरी रातों ने उन्हें रोशनी की अहमियत सिखा दी है।