प्रेगनेंसी में रिस्क बढ़ा देते हैं ये 5 फैक्टर्स डायबिटीज और बीपी जैसे आम लक्षण बन सकते हैं गंभीर चुनौती
News India Live, Digital Desk: मातृत्व सुख हर महिला के लिए एक खूबसूरत अनुभव होता है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं इस सफर को चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ऐसे 'एवरीडे फैक्टर्स' (Everyday Factors) हैं जो गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं। यदि समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए, तो ये प्री-मैच्योर डिलीवरी या अन्य जटिलताओं का कारण बन सकते हैं।
गर्भावस्था के जोखिम को बढ़ाने वाले मुख्य कारण
1. उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure): गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी, जिसे 'प्री-एक्लेम्पसिया' (Preeclampsia) कहा जाता है, बेहद खतरनाक हो सकता है। यह प्लेसेंटा को होने वाली रक्त की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है, जिससे बच्चे को कम ऑक्सीजन और पोषण मिलता है।
2. डायबिटीज (Gestational Diabetes): कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान पहली बार शुगर की समस्या होती है। इसे जेस्टेशनल डायबिटीज कहते हैं। यदि इसे कंट्रोल न किया जाए, तो बच्चे का वजन असामान्य रूप से बढ़ सकता है, जिससे सिजेरियन डिलीवरी (C-Section) की संभावना बढ़ जाती है।
3. उम्र का असर (Age Factor): 35 वर्ष की आयु के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं में जोखिम थोड़ा अधिक होता है। उम्र बढ़ने के साथ क्रोमोसोमल असामान्यताएं और गर्भपात (Miscarriage) का खतरा बढ़ जाता है।
4. मोटापा (Obesity): अधिक वजन न केवल गर्भधारण में समस्या पैदा करता है, बल्कि यह गर्भावस्था के दौरान संक्रमण, हृदय संबंधी समस्याओं और प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव का जोखिम भी बढ़ाता है।
5. जीवनशैली और तनाव: नींद की कमी, अत्यधिक मानसिक तनाव, धूम्रपान या शराब का सेवन सीधे तौर पर गर्भस्थ शिशु के विकास को प्रभावित करते हैं।
जोखिम कम करने के लिए क्या करें? (विशेषज्ञों की सलाह)
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन जोखिमों को कम करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम सुझाए हैं:
नियमित चेकअप: प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ्तों से ही डॉक्टर के संपर्क में रहें और सभी जरूरी टेस्ट समय पर करवाएं।
संतुलित आहार: अपनी डाइट में फोलिक एसिड, आयरन और कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। प्रोसेस्ड शुगर और जंक फूड से बचें।
शारीरिक सक्रियता: डॉक्टर की सलाह पर हल्के व्यायाम या योग करें। यह बीपी और शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
वजन पर नियंत्रण: गर्भावस्था के दौरान वजन का बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन इसे एक स्वस्थ सीमा के भीतर रखना जरूरी है।
पर्याप्त पानी पिएं: हाइड्रेटेड रहने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और किडनी फंक्शन बेहतर रहता है।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लें:
अचानक हाथों, पैरों या चेहरे पर सूजन आना।
तेज सिरदर्द या धुंधला दिखाई देना।
पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द।
बच्चे की हलचल में कमी महसूस होना।