बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होती है। वे ही पहले गुरु होते हैं, जो अपने बच्चे को सही आदतें और संस्कार सिखाते हैं। लेकिन कई बार पेरेंट्स की कुछ छोटी-छोटी गलतियां बच्चे को आलसी और गैर-जिम्मेदार बना सकती हैं।
अगर बचपन में ही इन गलतियों पर ध्यान न दिया जाए, तो बच्चे की आदतों पर इसका असर जीवनभर बना रहता है। आइए जानते हैं ऐसी ही 3 पेरेंटिंग मिस्टेक्स, जो बच्चे को आलसी बना सकती हैं और इन्हें सुधारने के आसान उपाय।
1. बच्चे का हर काम खुद करना
कुछ माता-पिता अपने बच्चों के प्रति जरूरत से ज्यादा सुरक्षात्मक (Overprotective) हो जाते हैं। वे स्कूल का बैग तैयार करने से लेकर, खिलौने समेटने और होमवर्क तक, बच्चे के हर काम में दखल देने लगते हैं।
इसका असर:
बच्चे को अपना काम खुद करने की आदत नहीं बनती।
वह छोटी-छोटी चीजों के लिए भी माता-पिता पर निर्भर हो जाता है।
धीरे-धीरे काम करने में उसे आलस महसूस होने लगता है।
क्या करें?
बच्चे को उसका काम खुद करने दें।
जरूरत पड़ने पर राह दिखाएं, लेकिन खुद काम न करें।
छोटे-छोटे टास्क देकर स्वतंत्र बनने की आदत डालें।
2. कठिन परिस्थितियों से बचाना
कई माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा किसी भी परेशानी का सामना न करे। वे उसकी हर छोटी समस्या का हल खुद निकालने लगते हैं। इससे बच्चे का आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है और वह आलसी और निर्भरशील बन जाता है।
इसका असर:
बच्चे में स्ट्रेस को हैंडल करने की क्षमता कम हो जाती है।
वह खुद से फैसले लेने से घबराने लगता है।
चुनौतियों से बचने की आदत उसे आगे चलकर असफल बना सकती है।
क्या करें?
बच्चे को छोटे-मोटे संघर्षों का सामना करने दें।
कोई समस्या आने पर उसे खुद सॉल्व करने के लिए प्रेरित करें।
आत्मनिर्भर बनने की आदत डालें और आत्मविश्वास बढ़ाएं।
3. माता-पिता की गलत आदतें
बच्चे हमेशा अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं। अगर माता-पिता खुद दिनभर फोन या टीवी में लगे रहते हैं, तो बच्चा भी वही आदतें अपनाने लगता है।
इसका असर:
बच्चा पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों से दूर हो जाता है।
समय की बर्बादी करने की आदत पड़ जाती है।
वह आलसी और काम टालने वाला (Procrastinator) बन सकता है।
क्या करें?
बच्चे के सामने मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल सीमित करें।
फ्री समय में बच्चे के साथ खेलें या बात करें।
रूटीन सेट करें और समय प्रबंधन सिखाएं।