राजस्थान में विधायक फंड और कमीशन का वो सच, जिसने विधानसभा में हड़कंप मचा दिया
News India Live, Digital Desk: सच तो यह है कि जब भी किसी सरकारी काम की बात आती है, तो 'परसेंटेज' और 'कमीशन' जैसे शब्द आम चर्चा का हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन जब यही मामला विधानसभा के पटल पर गूँजे, तो समझ लेना चाहिए कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है। राजस्थान में विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MLA-LAD) के तहत मिलने वाले फंड में जिस तरह से कमीशन की शिकायतें मिली हैं, उसने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
मामला आखिर है क्या?
सरल शब्दों में समझें तो विधायक को अपने क्षेत्र के विकास के लिए हर साल एक निश्चित रकम मिलती है। आरोप यह है कि इन फंडों के इस्तेमाल के दौरान कुछ लोग (अधिकारी और बिचौलिये) कथित तौर पर ठेकेदारों या लाभार्थियों से काम के बदले भारी-भरकम कमीशन की मांग कर रहे थे। कुछ मामलों में तो यह बात सामने आई है कि अगर 'कमीशन' नहीं पहुँचा, तो फाइलें आगे बढ़ना ही बंद हो गईं।
विधानसभा की सख्ती: अब नहीं चलेगी मनमर्जी
राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष और कई वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे को काफी गंभीरता से लिया है। आज यानी 6 जनवरी 2026 की ताजा स्थिति यह है कि मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच (Assembly Inquiry) के आदेश दिए जा चुके हैं। अब सवाल केवल किसी एक इलाके का नहीं है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया और काम की क्वालिटी का है। क्योंकि ज़ाहिर है, जब बीच में कमीशन खाया जाएगा, तो इस्तेमाल होने वाला मसाला खराब होगा और सड़कें पहली बारिश में ही उखड़ जाएंगी।
हम पर और आप पर इसका क्या असर होगा?
एक नागरिक के तौर पर हमें यह समझने की ज़रूरत है कि जब विकास कार्यों में भ्रष्टाचार होता है, तो उसका सीधा नुकसान हमारी लाइफस्टाइल पर पड़ता है। हमारे वार्ड या गांव में जो सामुदायिक भवन मजबूत बनना चाहिए था, वह सिर्फ कागजों पर अच्छा दिखता है।
अब विधानसभा की ये जांच कितनी गहराई तक जाएगी और कितने रसूखदारों पर गाज गिरेगी, ये आने वाले कुछ महीनों में साफ होगा। लेकिन एक बात पक्की है अब नपाई सिर्फ सड़क की चौड़ाई की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के गड्ढों की भी होनी शुरू हो गई है।