पहाड़ों के बीच लेह एयरपोर्ट का नया करिश्मा, बिना आग के ही अंदर से गर्म रहेगा टर्मिनल, जानिए ये अजूबा हुआ कैसे
News India Live, Digital Desk : लद्दाख का नाम सुनते ही हमारे जहन में बर्फीले पहाड़, नीला आसमान और हड्डियां कंपा देने वाली वो ठंड याद आ जाती है। यहाँ हवाई सफर करना जितना रोमांचक है, उतना ही मुश्किल भी, क्योंकि मौसम कब बिगड़ जाए कोई नहीं जानता। लेकिन अब लेह का 'कुशोक बकुला रिम्पोछे' एयरपोर्ट एक ऐसे बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है, जिसकी चर्चा आज पूरी दुनिया में हो रही है।
लेह एयरपोर्ट अब देश का ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे ऊंचाई पर स्थित उन चंद हवाई अड्डों में से एक बन गया है जो पूरी तरह से 'जियोथर्मल' (जमीन की गर्मी) और सोलर पावर से लैस होगा।
बिना बिजली खर्च किए मिलेगी टर्मिनल के अंदर गर्मी
लद्दाख में सबसे बड़ी चुनौती होती है सर्दियों के 6 महीने, जब तापमान -20 या -30 डिग्री तक चला जाता है। ऐसे में पूरे एयरपोर्ट टर्मिनल को गर्म रखना न सिर्फ महंगा होता था, बल्कि पर्यावरण के लिए भी नुकसानदेह। अब इसके लिए एक अनोखा 'देसी जुगाड़' इस्तेमाल किया गया है। जमीन के काफी नीचे जो कुदरती गर्मी होती है, पाइप्स के जरिए उसका इस्तेमाल टर्मिनल के तापमान को मेंटेन करने में किया जा रहा है। इसका फायदा ये होगा कि अंदर बैठा मुसाफिर चाहे वो बाहर कितनी ही बर्फबारी क्यों न हो रही हो, उसे ठंड महसूस नहीं होगी।
सूरज की रोशनी का भी होगा पूरा इस्तेमाल
लद्दाख को 'धूप की भूमि' भी कहा जाता है क्योंकि वहां साल के ज्यादातर दिन तेज धूप निकलती है। एयरपोर्ट के नए विंग में इतने बड़े सोलर पैनल और तकनीक लगाई गई है कि ये खुद अपनी बिजली पैदा कर पाएगा। इससे कार्बन एमिशन कम होगा और हमारा नाजुक इको-सिस्टम भी सुरक्षित रहेगा।
क्या बदलेगा आपके सफर में?
लेह एयरपोर्ट के नए अपग्रेडेशन और टर्मिनल के विस्तार से अब पैसेंजर कैपेसिटी कई गुना बढ़ जाएगी। पुराने समय में यात्रियों की जो भीड़ और चेक-इन की जो कतारें दिखती थीं, उनसे काफी हद तक निजात मिलेगी। इसके साथ ही, बेहतर तकनीक की वजह से विजिबिलिटी कम होने पर भी उड़ानों के सुरक्षित लैंड करने में आसानी होगी, जिससे सर्दियों के दौरान फ्लाइट कैंसिल होने का डर भी कम रहेगा।