आईपीएल में नहीं दिखेगा द फिज़ का जलवा? बीसीसीआई के 'क्शन और मुस्तफ़िज़ुर के आउट होने की इनसाइड स्टोरी

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News India Live, Digital Desk : कहते हैं कि क्रिकेट जितना मैदान पर खेला जाता है, उतना ही यह बंद कमरों की बैठकों में भी तय होता है। ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो मुस्तफ़िज़ुर रहमान का आईपीएल से इस तरह कटना महज इत्तेफ़ाक नहीं है। खबरों के गलियारों में चर्चा है कि बीसीसीआई के 'टॉप ब्रास' (आला अधिकारी) इस मामले में काफ़ी सक्रिय रहे हैं। अब सवाल उठता है कि आख़िर ऐसा हुआ क्यों?

बात असल में कुछ महीनों पहले शुरू हुई थी। जब आईपीएल की विंडो आती है, तो दुनिया भर के बोर्ड अपने खिलाड़ियों को खेलने की इजाज़त देते हैं। लेकिन बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) का रवैया पिछले कुछ समय से बीसीसीआई के साथ तालमेल बिठाने वाला नहीं रहा। एनओसी (NOC) देने में देरी या खिलाड़ियों को बीच सीज़न वापस बुलाने जैसी बातों ने कहीं न कहीं भारतीय बोर्ड को असहज कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई यह साफ़ संदेश देना चाहता है कि अगर कोई देश आईपीएल की अहमियत को नज़रअंदाज़ करता है, तो उसके असर खिलाड़ियों पर पड़ सकते हैं। मुस्तफ़िज़ुर, जो बांग्लादेश के सबसे बड़े सितारों में से एक हैं, इसी खिंचतान के केंद्र में आ गए हैं। चेन्नई जैसे बड़े कैंप का हिस्सा होने के बावजूद अगर वह टीम के साथ नहीं जुड़ पा रहे हैं, तो इसके पीछे सिर्फ़ व्यस्त कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्रिकेट कूटनीति की वह दीवार है जो दोनों देशों के बोर्ड्स के बीच कड़ी हो गई है।

एक फैन के तौर पर यह बात खलती ज़रूर है। हमें खिलाड़ियों की रस्साकशी नहीं, बल्कि उनका बेहतरीन खेल देखना होता है। लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर कभी-कभी साख की लड़ाई इतनी बढ़ जाती है कि खेल के बेहतरीन चेहरे भी फ्रेम से बाहर हो जाते हैं। अगर मुस्तफ़िज़ुर जैसे क्वालिटी बॉलर इस सीज़न आईपीएल का हिस्सा नहीं बनते हैं, तो यह सिर्फ़ उनके फैंस के लिए ही नहीं, बल्कि लीग के रोमांच के लिए भी एक बड़ी क्षति है।

देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या कोई बीच का रास्ता निकलता है या 'द फिज़' की खामोश उंगलियों का जादू इस बार आईपीएल के स्टेडियम्स में नहीं सुनाई देगा।