नवरात्रि का पहला दिन: बस इस एक चीज़ से करें शुरुआत, और माँ भर देंगी आपकी झोली
नवरात्रि का त्योहार सिर्फ़ व्रत, गरबा और जश्न का ही नाम नहीं है. यह प्रकृति के साथ हमारे गहरे रिश्ते को समझने और उसका सम्मान करने का भी त्योहार है. इस त्योहार की शुरुआत होती है एक बहुत ही ख़ूबसूरत और गहरी परंपरा के साथ - कलश स्थापना और जौ बोना. हम में से ज़्यादातर लोग इसे सिर्फ़ एक रस्म की तरह निभाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटा-सा काम आपके घर में सुख, समृद्धि और ख़ुशहाली लाने का सबसे बड़ा संकेत हो सकता है?
यह जौ, जिसे संस्कृत में 'यव' कहते हैं, कोई साधारण बीज नहीं है. शास्त्रों के अनुसार, जब इस सृष्टि की रचना हुई, तो सबसे पहली फ़सल जो उगी थी, वो जौ ही थी. इसीलिए इसे 'पूर्ण फ़सल' कहा जाता है. जब हम नवरात्रि के पहले दिन माँ के स्वागत के लिए जौ बोते हैं, तो हम असल में अपने घर में अन्नपूर्णा माँ का आह्वान करते हैं, ताकि हमारे घर के भंडार हमेशा भरे रहें.
भविष्य का आईना हैं ये जौ के दाने
मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान ये जौ जैसे-जैसे उगते हैं, वे हमें हमारे आने वाले साल का भविष्य बताते हैं:
- तेज़ी से और हरे-भरे उगें: अगर जौ के दाने तेज़ी से बढ़ें और उनका रंग हरा-भरा हो, तो यह एक बहुत ही शुभ संकेत है. इसका मतलब है कि आने वाला साल आपके घर में ख़ुशियां, तरक़्क़ी और समृद्धि लेकर आएगा.
- सफ़ेद या पीले रंग के उगें: अगर जौ का रंग पीला या सफ़ेद है और वो मुरझाए हुए लग रहे हैं, तो यह अच्छा संकेत नहीं माना जाता. यह दिखाता है कि आने वाले साल में आपको कुछ परेशानियों या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
- अगर उगें ही नहीं: अगर आपने सब कुछ सही किया और फिर भी जौ नहीं उग रहा है, तो यह एक अशुभ संकेत माना जाता है। यह संकेत देता है कि भविष्य में आपको किसी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है और आपको अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है।
यह है जौ बोने का सही और आसान तरीक़ा
इस परंपरा का पूरा फल पाने के लिए, इसे सही तरीक़े से करना बहुत ज़रूरी है:
- बर्तन का चुनाव: एक मिट्टी का चौड़े मुंह वाला बर्तन लें. मिट्टी प्रकृति का प्रतीक है और इसमें बीज आसानी से उगते हैं.
- मिट्टी तैयार करें: बर्तन में साफ़-सुथरी मिट्टी की एक परत बिछाएं.
- जौ बोएं: मिट्टी के ऊपर मुट्ठी भर जौ के दाने फैला दें. ध्यान रहे, दाने एक-दूसरे के ऊपर ज़्यादा न चढ़ें.
- पानी दें: अब इसके ऊपर मिट्टी की एक और हल्की परत डालें और बहुत धीरे-धीरे थोड़ा पानी छिड़कें. ज़्यादा पानी डालने से बीज सड़ सकते हैं.
- कलश स्थापना: इस बर्तन के बीच में कलश की स्थापना करें.
- रोज़ाना पूजा और पानी: नवरात्रि के नौ दिनों तक हर रोज़ माँ की पूजा के साथ-साथ इस बर्तन की भी पूजा करें और ज़रूरत के अनुसार हल्का-सा पानी छिड़कते रहें.
यह सिर्फ़ एक परंपरा नहीं है, यह हमारी आस्था का वो बीज है, जो हमें यक़ीन दिलाता है कि अगर हमारी श्रद्धा सच्ची हो, तो माँ हमारी ज़िंदगी को भी ख़ुशियों की हरियाली से भर देंगी.