MBBS में एडमिशन का सपना और बीच में बदलते नियम ,सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अब क्या होगा छात्रों का?

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News India Live, Digital Desk: डॉक्टर बनने का सपना देख रहे छात्रों और उनके माता-पिता के लिए पिछला कुछ समय काफी तनावपूर्ण रहा है। ऊपर से अगर सरकार बीच काउंसलिंग में नियमों के साथ फेरबदल करने लगे, तो बेचैनी और बढ़ जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ पंजाब में, जहाँ एमबीबीएस (MBBS) की सीटों को लेकर पंजाब सरकार के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही सख्त रुख अपनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि किसी भी हाल में NEET UG एडमिशन की प्रक्रिया के बीच में नियमों या क्राइटेरिया को बदला नहीं जा सकता।

आखिर सारा मामला क्या था?
असल में विवाद पंजाब सरकार के उस आदेश से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने काउंसलिंग और एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता नियमों (Eligibility Criteria) में बदलाव करने की कोशिश की थी। कोर्ट ने इस पर गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह "छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़" करने जैसा है। जजों की बेंच ने एक बहुत ही सरल लेकिन बड़ी बात कही— "एक बार खेल शुरू हो जाने के बाद आप खेल के नियम नहीं बदल सकते।"

छात्रों पर इसका क्या असर पड़ता?
सोचिए, एक छात्र जिसने साल भर मेहनत की, उसने पुराने नियमों को ध्यान में रखकर अपनी प्राथमिकताएं तय कीं। लेकिन अचानक से सरकार कहती है कि अब ये सीटें इस कैटेगरी को नहीं बल्कि उसे मिलेंगी। इससे पूरी मेरिट लिस्ट बिगड़ने का डर रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने यही समझाया कि इस तरह की "मिड-वे" छेड़छाड़ न केवल प्रशासनिक रूप से गलत है, बल्कि यह उन छात्रों के प्रति अन्याय है जो नियम मानकर चले थे।

अदालत की वो खरी-खरी बातें
कोर्ट ने साफ़ किया कि चाहे एनआरआई (NRI) कोटे का मामला हो या स्थानीय सीटों का, जो शर्तें एडमिशन का विज्ञापन (Prospectus) निकलते समय तय हो गई थीं, वही अंत तक रहेंगी। अदालत ने पंजाब सरकार को एक तरह से यह नसीहत भी दी है कि वे प्रक्रियाओं को ज़्यादा पारदर्शी बनाएं ताकि मेधावी छात्रों (Merit Candidates) के अधिकारों का हनन न हो।

छात्रों के लिए बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उन हजारों उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली है जो इन नए बदलावों के चलते अपनी सीट खोने के डर में थे। यह फैसला पूरे देश के राज्यों के लिए एक नज़ीर (Example) बन गया है कि काउंसलिंग प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ चलाना कितना ज़रूरी है।