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March 18 2026 10:17 am

बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा ‘ट्विस्ट’! अब परदे के पीछे से नहीं, सामने से ‘खेला’ करेंगे प्रशांत किशोर

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चाणक्य... चुनावी रणनीतिकार... किंगमेकर... प्रशांत किशोर (PK) को आज तक हम सब इन्हीं नामों से जानते आए हैं। वो ‘खिलाड़ी’ जो पर्दे के पीछे रहकर बड़े-बड़े नेताओं और पार्टियों की जीत की स्क्रिप्ट लिखता था। नरेंद्र मोदी की 2014 की ऐतिहासिक जीत से लेकर ममता बनर्जी के ‘खेला होबे’ तक, उनकी सफलता की कहानी हर किसी की जुबान पर रही है।

लेकिन अब, कहानी बदलने वाली है। ‘किंगमेकर’ ने अब खुद ‘किंग’ बनने का ऐलान कर दिया है!

सालों तक दूसरों को चुनाव जितवाने वाले प्रशांत किशोर, अब खुद बिहार के चुनावी अखाड़े में उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उनकी पार्टी ‘जन सुराज’ 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी और PK खुद भी चुनाव लड़ सकते हैं।

‘गांव-गांव, गली-गली’ घूमने के बाद लिया बड़ा फैसला

यह कोई रातों-रात लिया गया फैसला नहीं है। प्रशांत किशोर पिछले कई महीनों से अपनी ‘पदयात्रा’ के जरिए बिहार के गांव-गांव, गली-गली की धूल छान रहे हैं। वे लाखों लोगों से मिले, उनकी समस्याएं सुनीं, और जमीन की उस हकीकत को समझा जिसे शायद पटना और दिल्ली के नेता देख नहीं पाते।

अब, इसी जमीनी हकीकत को बदलने के लिए उन्होंने राजनीति के इस बंद कमरे से बाहर निकलकर सीधे जनता के बीच आने का फैसला किया है।

9 अक्टूबर को आएगा बड़ा ‘भूचाल’!

‘जन सुराज’ इस चुनावी जंग के लिए पूरी तरह तैयार है और इसकी पहली गर्जना 9 अक्टूबर को सुनाई देगी। इस दिन, पार्टी अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करने वाली है। यह लिस्ट बिहार की स्थापित पार्टियों - JDU, RJD और BJP - तीनों की नींद उड़ा सकती है।

नीतीश-तेजस्वी की बढ़ेगी टेंशन?

प्रशांत किशोर के मैदान में आने से बिहार का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गया है।

  • किसको होगा नुकसान?: राजनीतिक पंडितों का मानना है कि PK का मुख्य असर JDU के वोटर बेस पर पड़ सकता है, क्योंकि वे खुद नीतीश कुमार के पुराने सहयोगी रहे हैं और उनके काम करने के तरीके को बखूबी जानते हैं।
  • युवाओं पर नजर: PK की नजर बिहार के उन युवा और ‘साइलेंट’ वोटरों पर है जो पारंपरिक राजनीति से तंग आ चुके हैं और एक नया, पढ़ा-लिखा और विकास करने वाला विकल्प ढूंढ रहे हैं।

यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जो शख्स कल तक लैपटॉप और डेटा से चुनाव की हवा का रुख मोड़ देता था, वह जब खुद जनता के बीच जाकर वोट मांगेगा, तो बिहार की जनता उसे कितना प्यार और समर्थन देती है। एक बात तो तय है, बिहार की राजनीति का ‘खेल’ अब और भी रोमांचक होने वाला है।