कश्मीर में Terror Network पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
दिल्ली में हुए आतंकी हमले के बाद अब जम्मू-कश्मीर में पुलिस ने आतंकियों और उनके मददगारों के नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार (12 नवंबर) को पुलिस ने कश्मीर घाटी के 10 जिलों में एक साथ लगभग 500 ठिकानों पर छापेमारी की। यह एक्शन उन लोगों पर लिया गया है जो प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JEI) और दूसरे आतंकी गुटों से जुड़े हुए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें पक्की खुफिया जानकारी मिली थी कि ये लोग घाटी में आतंकी गतिविधियों को फिर से हवा देने की कोशिश कर रहे थे। इसी जानकारी के आधार पर श्रीनगर, पुलवामा, कुलगाम और सोपोर समेत लगभग सभी बड़े जिलों में यह ऑपरेशन चलाया गया।
कौन हैं ये "ओवरग्राउंड वर्कर्स"?
अक्सर हमारे मन में सवाल आता है कि ये "ओवरग्राउंड वर्कर्स" (OGWs) कौन होते हैं? सीधे शब्दों में कहें तो, ये वो लोग हैं जो खुद हथियार नहीं उठाते, लेकिन पर्दे के पीछे रहकर आतंकियों की पूरी मदद करते हैं। इनका काम आतंकियों को रहने के लिए सुरक्षित जगह देना, उन्हें पैसे और जरूरी सामान मुहैया कराना, और खुफिया जानकारी इधर-उधर पहुंचाना होता है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क को तोड़े बिना आतंकवाद को जड़ से खत्म करना मुश्किल है।
ऑपरेशन का पैमाना कितना बड़ा था?
इस अभियान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले श्रीनगर में 150 जगहों पर छापे मारे गए। वहीं, दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में यह आंकड़ा 200 से भी ज्यादा था। पिछले चार दिनों में पुलिस ने 400 से ज्यादा तलाशी अभियान चलाए हैं।
क्या मिला छापेमारी में?
इस बड़े ऑपरेशन के दौरान 500 से ज्यादा लोगों से कड़ी पूछताछ की गई है। कई लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि कुछ को गिरफ्तार भी किया गया है। उनके ठिकानों से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण (जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप) जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
पुलिस का मकसद साफ है - सिर्फ आतंकियों को ही नहीं, बल्कि उस पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना, जो घाटी में आतंक को जिंदा रखे हुए है। यह कार्रवाई उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।