UP वालों की हो गई बल्ले-बल्ले! अब 20 घंटे का सफर सिर्फ 8 घंटे में होगा पूरा, बनने जा रहा सबसे लंबा एक्सप्रेसवे
सोचिए, अगर आपको पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिमी यूपी के शामली तक का सफर करना हो, तो कितना समय लगता है? पूरा एक दिन या शायद उससे भी ज्यादा! यह लंबा और थकाऊ सफर अब तक पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के बीच की एक बड़ी दूरी का प्रतीक रहा है।
लेकिन अब यह कहानी और यह दूरी, दोनों ही जल्द ही अतीत बनने वाली हैं। उत्तर प्रदेश के लोगों को एक ऐसा तोहफा मिलने जा रहा है, जो प्रदेश के विकास के नक्शे को हमेशा के लिए बदल देगा।
सरकार गोरखपुर से शामली तक एक नए और विशाल एक्सप्रेसवे के निर्माण पर काम शुरू कर चुकी है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि पूर्वांचल को सीधे-सीधे पश्चिमी यूपी और दिल्ली-एनसीआर से जोड़ने वाला एक ‘इकोनॉमिक कॉरिडोर’ होगा।
क्या है यह महा-प्रोजेक्ट?
- लगभग 700 किलोमीटर लंबा: यह उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे हो सकता है, जो लगभग 700 किलोमीटर का सफर तय करेगा।
- 22 जिलों को जोड़ेगा: यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 22 बड़े जिलों जैसे गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, अयोध्या, बाराबंकी, लखनऊ, सीतापुर, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, बरेली, मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, अमरोहा, मेरठ, मुजफ्फरनगर से होते हुए शामली तक पहुंचेगा।
- ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे: यह कोई पुरानी सड़क को चौड़ा करके नहीं बनाया जाएगा, बल्कि यह एक बिल्कुल नई और सीधी सड़क होगी जो खेतों के बीच से होकर गुजरेगी, जिससे सफर में कोई रुकावट नहीं होगी।
आम आदमी को इससे क्या फायदा मिलेगा?
- समय का चमत्कार: जो सफर आज 20 घंटे से ज्यादा का है, वह इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद घटकर सिर्फ 8 से 10 घंटे का रह जाएगा।
- तरक्की की नई लाइन: यह सिर्फ गाड़ियों को ही नहीं, बल्कि तरक्की को भी रफ्तार देगा। एक्सप्रेसवे के किनारे नए उद्योग, आईटी पार्क और फैक्ट्रियां लगेंगी।
- किसानों और व्यापारियों का फायदा: अब पूर्वांचल के किसानों की फसल और कारीगरों का सामान कुछ ही घंटों में सीधे दिल्ली और पश्चिमी यूपी के बड़े बाजारों तक पहुंच सकेगा, जिससे उनकी कमाई बढ़ेगी।
- घर के पास रोजगार: जब आपके अपने जिले में फैक्ट्रियां लगेंगी, तो वहां के युवाओं को नौकरी के लिए घर छोड़कर नोएडा या दिल्ली जाने की मजबूरी कम हो जाएगी।
काम कहां तक पहुंचा?
इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) का काम शुरू हो गया है, और अमरोहा जैसे कुछ जिलों में इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं।
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ कंक्रीट का एक रास्ता नहीं है, बल्कि यह पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच की दूरी को मिटाने वाला और लाखों लोगों के लिए रोजगार और विकास के नए दरवाजे खोलने वाला एक सपना है, जो अब हकीकत बनने की राह पर है।