झारखंड के अस्पतालों में अब नहीं चलेगी दलालों की मनमानी ,एक मरीज-एक QR कोड, सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक

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News India Live, Digital Desk : अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इलाज के लिए रिम्स (RIMS Ranchi) या धनबाद, जमशेदपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जाने का प्लान बना रहा है, तो रुकिए! यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। अब पुराना 'पर्ची कटवाओ और लाइन में धक्के खाओ' वाला सिस्टम बदलने वाला है।

झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने और मरीजों को दलालों या दवा की कमी से बचाने के लिए एक नया 'डिजिटल' नियम लागू करने का फैसला किया है। आसान भाषा में समझें तो अब आपका इलाज और आपको मिलने वाली सरकारी दवाइयां 'QR कोड स्कैनिंग' पर निर्भर होंगी।

आखिर क्या है यह नया QR कोड सिस्टम?
अभी तक क्या होता था? आप डॉक्टर को दिखाते थे, वो पर्ची पर दवा लिखते थे, आप काउंटर पर जाते थे और वहां अक्सर सुनने को मिलता था— "दवा खत्म हो गई है, बाहर से ले लो।" कई बार यह दवाएं स्टोर में होती थीं लेकिन चोरी-छुपे बेच दी जाती थीं।

अब इस नए सिस्टम के तहत:

  1. पर्ची पर QR कोड: मरीज के रजिस्ट्रेशन के वक्त जो ओपीडी (OPD) पर्ची मिलेगी, उस पर एक खास QR कोड होगा।
  2. दवा काउंटर पर स्कैनिंग: जब आप दवा लेने जाएंगे, तो फार्मासिस्ट पहले आपकी पर्ची का कोड स्कैन करेगा।
  3. रिकॉर्ड: स्कैन करते ही सिस्टम में दर्ज हो जाएगा कि किस मरीज को, किस डॉक्टर ने, कितनी दवा लिखी थी और काउंटर से कितनी दवा दी गई।

बिना स्कैन किए न इलाज, न दवा!
नियमों को सख्त किया जा रहा है। निर्देश साफ़ हैं कि रजिस्ट्रेशन काउंटर हो या दवा वितरण केंद्र (Drug Distribution Counter), बिना कोड स्कैन किए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। इसका मतलब है कि अब फ़र्जी पर्ची पर कोई दवा नहीं ले पाएगा और न ही रजिस्टर में गड़बड़ी हो सकेगी।

मरीजों को क्या फायदा होगा?

  • फ्री दवा की गारंटी: अक्सर मरीजों की शिकायत रहती थी कि अस्पताल से दवा नहीं मिलती। अब ऑनलाइन एंट्री होने से 'दवा चोरी' रुकेगी, जिससे गरीब मरीजों को पूरी दवा मिल पाएगी।
  • दलालों से मुक्ति: पर्ची और सिस्टम ऑनलाइन लिंक होने से बिचौलियों का खेल खत्म हो जाएगा।
  • समय की बचत: डिजिटलीकरण से काम तेज़ी से होगा और घंटों लाइनों में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा।

कहां लागू हो रहा है?
यह व्यवस्था राज्य के सभी प्रमुख मेडिकल कॉलेजों (जैसे रिम्स रांची, एमजीएम जमशेदपुर, एसएनएमएमसीएच धनबाद) और सदर अस्पतालों में सख्ती से लागू की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे 'ई-औषधि' (E-Aushadhi) पोर्टल से जोड़ दिया है।

आपके लिए सलाह:
अगली बार जब आप अस्पताल जाएं, तो अपनी ओपीडी पर्ची को संभालकर रखें। उसे मोड़ें-तुड़ें नहीं, क्योंकि अगर QR कोड खराब हुआ तो काउंटर पर स्कैनिंग में दिक्कत आ सकती है और आपको दवा मिलने में परेशानी हो सकती है।

बदलाव थोड़ा सख्त जरूर है, लेकिन उम्मीद है कि इससे झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधरेगी!