Tennis Player : चोट भी जिसका रास्ता न रोक सकी, दर्द से जूझते हुए जोकोविच ने यूएस ओपन में रचा इतिहास

Post

News India Live, Digital Desk: एक सच्चा चैंपियन वही होता है जो सिर्फ अपने विरोधी को नहीं, बल्कि हर मुश्किल हालात को मात दे। टेनिस के बादशाह नोवाक जोकोविच ने एक बार फिर यह साबित कर दिखाया है। यूएस ओपन के तीसरे दौर के मुकाबले में पीठ दर्द से बुरी तरह परेशान होने के बावजूद, उन्होंने ब्रिटेन के कैमरन नॉरी को हराकर अंतिम 16 में अपनी जगह पक्की कर ली। यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि जोकोविच के हौसले और कभी न हार मानने वाले जज्बे की कहानी है।

जब मैच के बीच दर्द से कराह उठे जोकोविच

मैच के दौरान एक पल ऐसा आया जब लगा कि जोकोविच का सफर यहीं खत्म हो जाएगा। पहले सेट में 5-3 से आगे चल रहे जोकोविच एक वॉली तक पहुंचने के लिए अजीब तरह से उछले और तुरंत अपनी पीठ पकड़कर दर्द से जूझते नजर आए। हालात इतने गंभीर हो गए कि उन्हें मेडिकल टाइमआउट लेकर इलाज के लिए लॉकर रूम तक जाना पड़ा। स्टेडियम में बैठे दर्शक और दुनिया भर में मैच देख रहे फैंस की सांसें अटक गईं।

लेकिन जोकोविच मिट्टी के नहीं, फौलाद के बने हैं। इलाज के बाद वे कोर्ट पर लौटे और पहला सेट 6-4 से अपने नाम कर लिया। दर्द हालांकि बना रहा और दूसरे सेट में भी उन्हें अपनी कुर्सी पर बैठकर फिजियो से मसाज करवानी पड़ी।

दर्द पर भारी पड़ा हौसला, नॉरी को किया पस्त

दूसरे सेट में नॉरी ने वापसी की और सेट को 7-6 से जीत लिया। ऐसा लगा कि चोट जोकोविच पर हावी हो रही है, लेकिन 24 ग्रैंड स्लैम के विजेता ने यहाँ से अपने अनुभव और मानसिक मजबूती का असली खेल दिखाया। उन्होंने अगले दो सेट 6-2, 6-3 से जीतकर मैच अपने नाम कर लिया।इस जीत के साथ, 38 साल के जोकोविच 1991 में जिमी कॉनर्स के बाद यूएस ओपन के चौथे दौर में पहुंचने वाले सबसे उम्रदराज पुरुष खिलाड़ी बन गए।

मैच के बाद जब उनसे चोट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं ठीक हूँ। मैं पहले की तरह ही जवान और मजबूत हूँ।” उन्होंने यह भी कहा कि यह इस टूर्नामेंट में उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ सर्विस प्रदर्शन था।

इस जीत के साथ जोकोविच ने ग्रैंड स्लैम के अंतिम 16 में 69वीं बार पहुंचकर रोजर फेडरर के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। अब चौथे दौर में उनका सामना जर्मनी के जान-लेनार्ड स्ट्रफ से होगा।] यह मैच दिखाता है कि क्यों जोकोविच को सिर्फ एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक योद्धा भी माना जाता है।