न्यूज़ीलैंड वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया की तैयारी, क्या रोहित-कोहली को मिलेगा आराम या युवाओं पर खेला जाएगा दांव?
News India Live, Digital Desk : जब भी टीम चुनी जाती है, तो कोच गौतम गंभीर की 'आक्रामक रणनीति' की छाप साफ़ दिखाई देती है। खबर है कि इस बार न्यूज़ीलैंड सीरीज के लिए सलेक्शन मीटिंग में भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों को ध्यान में रखा जा रहा है। अजीत अगरकर की अगुआई वाली सलेक्शन कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीनियर खिलाड़ियों के वर्कलोड को मैनेज करने की है।
रोहित, कोहली और भविष्य की राह
विराट कोहली और रोहित शर्मा का अनुभव टीम के लिए संजीवनी जैसा है, लेकिन चर्चा यह भी है कि क्या इन दिग्गजों को छोटी सीरीज में आराम देकर शुभमन गिल को बड़ी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए? गिल को पिछले कुछ समय से कप्तान के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। अगर न्यूज़ीलैंड जैसी मज़बूत टीम के खिलाफ युवा खिलाड़ियों को कमान मिलती है, तो यह भारतीय क्रिकेट के नए युग की शुरुआत होगी।
पंत की वापसी और पांड्या की फिटनेस
ऋषभ पंत की मौजूदगी मिडिल आर्डर में जान फूंक देती है, लेकिन मैनेजमेंट की नजर उनकी फिटनेस और वर्कलोड पर भी है। वहीं हार्दिक पांड्या को लेकर भी बातचीत गरम है—क्या वह पूरे 10 ओवर फेंकने के लिए फिट हैं? न्यूज़ीलैंड की पिचों और उनकी टीम के अंदाज़ को देखते हुए एक ऑलराउंडर की भूमिका सबसे ज्यादा अहम हो जाती है।
बुमराह का वर्कलोड मैनेजमेंट
जसप्रीत बुमराह भारतीय टीम के लिए वो हथियार हैं जिन्हें हर मैच में उतारना जोखिम भरा हो सकता है। 2026 का कैलेंडर काफी व्यस्त है, इसलिए मुमकिन है कि उन्हें इस सीरीज से आराम मिले और अर्शदीप सिंह या मोहम्मद सिराज के साथ किसी नए तेज़ गेंदबाज को मौका दिया जाए।
गंभीर-अगरकर का विज़न
गौतम गंभीर का कोच बनने के बाद यह साफ़ हो गया है कि टीम में अब सिर्फ़ नाम से जगह नहीं मिलेगी, बल्कि 'करंट फॉर्म' सबसे ऊपर होगी। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ होने वाली यह वनडे सीरीज केवल एक सीरीज नहीं है, बल्कि यह उन खिलाड़ियों के लिए ऑडिशन है जो आने वाले समय में भारत का झंडा बुलंद करेंगे।
फिलहाल सलेक्शन कमेटी की मीटिंग जारी है और शाम तक या अगले कुछ घंटों में आधिकारिक स्क्वॉड सबके सामने होगा।