समंदर में छिड़ा टैंकर वॉर ईरान और इजरायल के बीच फंसे भारतीय नाविक, 36 तेल टैंकरों पर हमला, क्या है ताजा हालात
News India Live, Digital Desk: मिडल ईस्ट (Middle East) में चल रहे भीषण तनाव के बीच समंदर की लहरों पर एक नया युद्ध शुरू हो गया है। ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव के कारण लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। सबसे डराने वाली बात यह है कि इन जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक (Indian Sailors) तैनात हैं, जिनकी जान अब खतरे में नजर आ रही है।
36 तेल टैंकरों पर हमला: समंदर में मचा कोहराम
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में 36 से अधिक तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया गया है। इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित गुटों का हाथ बताया जा रहा है। इन हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारतीय क्रू मेंबर्स वाले कई जहाज इस समय असुरक्षित जलक्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर मंडराया संकट
दुनिया भर के मर्चेंट नेवी जहाजों पर भारतीय नाविकों की बड़ी हिस्सेदारी है। वर्तमान में जो टैंकर युद्ध की चपेट में आ रहे हैं, उनमें से कई पर भारतीय कैप्टन और क्रू तैनात हैं। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय स्थिति पर बारीक नजर रखे हुए हैं। भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने भी अरब सागर और आसपास के इलाकों में अपनी गश्त बढ़ा दी है ताकि भारतीय हितों की रक्षा की जा सके।
क्या है इस 'टैंकर युद्ध' का असली कारण?
ईरान और इजरायल के बीच का गुप्त युद्ध अब खुलकर सामने आ गया है। इजरायल का आरोप है कि ईरान समुद्री रास्तों का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी के लिए कर रहा है, वहीं ईरान का कहना है कि वह अपने जहाजों पर होने वाले हमलों का बदला ले रहा है। इस 'तूतू-मैंमैं' में निर्दोष नाविक और व्यापारिक जहाज पिस रहे हैं।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात इसी समुद्री रास्ते से करता है। यदि यह टैंकर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आ सकता है। साथ ही, हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गया है।