कोरोना महामारी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया आगे बढ़ रही है, लेकिन कोविड वैक्सीन के संभावित दुष्प्रभावों पर सवाल अब भी उठ रहे हैं। भारत में कुछ मामलों में वैक्सीन के साइड इफेक्ट से कथित मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि कोविड-19 से जुड़ी मौतों और वैक्सीन से संबंधित मौतों को अलग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या ऐसे मामलों के लिए मुआवजा नीति बनाई जा सकती है। केंद्र ने जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा है, और अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।
अमेरिका-रूस की बढ़ती नजदीकियां: भारत के लिए चुनौती या कूटनीतिक अवसर?
क्या है मामला?
सईदा नाम की महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनके पति की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट से हुई।उन्होंने केरल हाईकोर्ट में मुआवजे की मांग की थी।हाईकोर्ट ने 2022 में आदेश दिया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को एक नीति बनानी चाहिए ताकि पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिल सके।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि महामारी को आपदा घोषित किया गया था, लेकिन टीकाकरण एक मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत हुआ।सरकार के अनुसार, AEFI (Adverse Events Following Immunization) समिति ही यह तय करती है कि मौत का कारण सीधे वैक्सीन से जुड़ा है या नहीं।केंद्र ने तर्क दिया कि ऐसे मामलों के लिए कोई मुआवजा नीति नहीं थी, इसलिए हाईकोर्ट के फैसले पर 2023 में रोक लगाई गई थी।