सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी करार दिए गए एक व्यक्ति को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा, “सारा दिन घर में कभी सरस्वती पूजा और कभी लक्ष्मी पूजा, और फिर ऐसी हरकतें।” यह टिप्पणी उस समय की गई जब आरोपी ने अपनी डेढ़ साल की सजा के खिलाफ अपील दाखिल की। अदालत ने सुझाव दिया कि यदि आरोपी अपनी बेटियों के नाम कुछ जमीन ट्रांसफर करता है, तो राहत पर विचार किया जा सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला झारखंड का है, जहां याचिकाकर्ता योगेश्वर साव को 2015 में भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (दहेज उत्पीड़न) के तहत दोषी करार दिया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें ढाई साल की सजा सुनाई थी। आरोप था कि उन्होंने अपनी पत्नी से 50 हजार रुपये दहेज की मांग की थी। इस दंपति की शादी 2003 में हुई थी और उनकी दो बेटियां हैं।
पत्नी ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपी ने जबरदस्ती उसका गर्भाशय हटवा दिया। हालांकि, इस आरोप पर कोई ठोस सबूत नहीं मिला, और इसे अदालत ने खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने अपील की सुनवाई के दौरान कहा,
“आप अपनी ही बेटियों की परवाह नहीं करते। ऐसे क्रूर व्यक्ति को बार-बार कोर्ट में आने की अनुमति कैसे दी जा सकती है?”
अदालत ने आरोपी को राहत देने के लिए एक शर्त रखी। बेंच ने कहा कि यदि योगेश्वर साव अपनी खेती की जमीन का कुछ हिस्सा अपनी बेटियों के नाम कर देता है, तो उसकी सजा में थोड़ी राहत दी जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कदम बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जरूरी है।
अदालती प्रक्रिया और फैसले
- 2015: ट्रायल कोर्ट ने योगेश्वर को दोषी करार देते हुए ढाई साल की सजा सुनाई।
- झारखंड हाई कोर्ट का निर्णय: आरोपी को 11 महीने की कैद के बाद राहत दी गई और सजा निलंबित कर दी गई।
- सितंबर 2024: हाई कोर्ट ने आरोपी को फिर से दोषी ठहराते हुए डेढ़ साल की सजा सुनाई और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
- दिसंबर 2024: दोषी ने सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
अदालत की कड़ी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की हरकतों पर नाराजगी जताते हुए कहा, “जो व्यक्ति अपनी बेटियों का भी ख्याल नहीं रखता, उसे राहत देने का कोई कारण नहीं है।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेटियों के नाम पर जमीन ट्रांसफर करने का फैसला उनकी सुरक्षा और भविष्य के लिए अहम है।
महिला के आरोप और अदालत की राय
पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति ने जबरन उसका गर्भाशय हटवा दिया। हालांकि, अदालत ने इस मामले में सबूतों की कमी के चलते आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। लेकिन दहेज उत्पीड़न के मामले में आरोपी को सजा दी गई।