एक शादी को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कपल के केस ने न्यायाधीशों को भी भावुक कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने शादी को खत्म करने का फैसला सुनाया और साथ ही दोनों को आगे बढ़ने की सलाह दी।
अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि यह अब तक के सबसे दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में से एक था। जस्टिस अभय ओक की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई की।
चार साल पुरानी शादी को खत्म करने का आदेश
- मई 2020 में हुई शादी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश से खत्म कर दिया।
- पति-पत्नी ने एक-दूसरे पर 17 मुकदमे दर्ज किए थे, जिन्हें भी रद्द कर दिया गया।
- अदालत ने कपल को सलाह दी कि वे अब शांति से रहें और जीवन में आगे बढ़ें।
कोर्ट ने कहा:
“दोनों पार्टियां युवा हैं। उन्हें अपने भविष्य की ओर देखना चाहिए। अगर शादी असफल हो गई है, तो यह जीवन का अंत नहीं है। उन्हें आगे बढ़कर एक नया जीवन शुरू करना चाहिए।”
शादी के बाद पत्नी ने क्यों छोड़ा ससुराल?
2020 में हुई शादी के कुछ ही महीनों बाद महिला अपने माता-पिता के घर लौट गई थी।
- रिश्ते में खटास आने के कारण वह ससुराल में नहीं रह पाई।
- महिला ने पति और ससुरालवालों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।
- अदालत ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण मामला करार दिया, क्योंकि शादी के एक साल के भीतर ही पत्नी को ससुराल छोड़ना पड़ा।
कोर्ट ने वकीलों को दी सलाह
कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों से कहा कि इस केस को और लंबा खींचना व्यर्थ होगा, क्योंकि यह अत्यधिक समय ले सकता है और किसी समाधान तक नहीं पहुंचेगा।
वकीलों ने अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का उपयोग कर शादी खत्म करने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
अब इस फैसले के बाद दोनों अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।