Punjab Politics : लोकसभा में उठा SGPC चुनाव का मुद्दा, सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण
News India Live, Digital Desk: शिअद अध्यक्ष और बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल ने लोक सभा में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) चुनाव का मामला उठाया, जिसमें यह कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय शिरोमणि अकाली दल बादल और आम आदमी पार्टी (आप) के एक समूह के चुनाव चिन्ह जब्त करने में विफल रहा. चुनाव नियम के अनुसार यह चुनाव 5 साल के अंदर ही होने चाहिए लेकिन 11 साल का समय हो गया और केंद्रीय गृह मंत्रालय चुनाव को लेकर उदासीन बना रहा. इसके कारण लोक सभा में इस पर मुद्दा उठाया गया.
SGPC चुनाव का मामला लोकसभा में क्यों उठा?
- लोकसभा में मुद्दा: शिअद की अध्यक्ष हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा में एसजीपीसी चुनावों के आयोजन में देरी का मुद्दा उठाया. एसजीपीसी एक ऐतिहासिक सिख धार्मिक निकाय है, और उसके चुनाव में लंबे समय से देरी हो रही है.
- नियमों का उल्लंघन: एसजीपीसी के चुनाव हर पांच साल में होने चाहिए, लेकिन पिछले 11 वर्षों से ये चुनाव नहीं हुए हैं. हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया.
- चुनाव चिन्हों का विवाद: मुद्दा यह भी था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय शिरोमणि अकाली दल बादल और आम आदमी पार्टी (आप) के एक समूह के चुनाव चिन्ह जब्त करने में विफल रहा, जबकि ये दल चुनाव लड़ने वाले हैं.
- केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण: कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस पर केंद्रीय सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है. वह जानना चाहते हैं कि चुनावों में इतनी देरी क्यों हो रही है और नियमों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है.
एसजीपीसी और पंजाब की राजनीति में महत्व:
एसजीपीसी एक अर्ध-राज्य है और पंजाब के साथ-साथ सिख समुदाय के लिए इसका बहुत अधिक महत्व है. पंजाब की राजनीति में भी एसजीपीसी चुनाव का परिणाम काफी अहम होता है. चुनाव में हो रही इस देरी से सिख समुदाय में बेचैनी है और यह सीधे तौर पर पंजाब की राजनीति को प्रभावित कर रहा है. हरसिमरत कौर बादल और सुखजिंदर सिंह रंधावा द्वारा उठाए गए इस मुद्दे से केंद्र सरकार पर एसजीपीसी चुनाव शीघ्र कराने का दबाव बढ़ेगा.