नौकरी छोड़ 2023 में पहली बार थामी पिस्टल, पहले ही इवेंट में जीता गोल्ड
दृढ़ इच्छाशक्ति, अटूट हौसले और कुछ कर गुजरने के जुनून के आगे दुनिया की बड़ी से बड़ी रुकावटें भी घुटने टेक देती हैं। इस कहावत को अक्षरशः सच कर दिखाया है देश की होनहार निशानेबाज और एशियन पैरा गेम्स की पदकवीर सृष्टि पांडे ने। एक समय था जब सृष्टि एक कॉरपोरेट दफ्तर में बैठकर अपनी 9 से 5 की सुरक्षित नौकरी कर रही थीं, लेकिन उनके सपनों की उड़ान इससे कहीं अधिक ऊंची थी। अपनी स्थापित नौकरी को अलविदा कहकर साल 2023 में जब उन्होंने पहली बार हाथ में एयर पिस्टल थामी, तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वे इतिहास रचने जा रही हैं। शूटिंग रेंज में कदम रखते ही सृष्टि ने अपने पहले ही प्रतिस्पर्धी इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर सभी को हैरान कर दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा लहराते हुए देश को गौरवान्वित किया। सृष्टि की यह असाधारण कहानी आज देश के करोड़ों युवाओं और दिव्यांग एथलीटों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन चुकी है।
#1 कॉरपोरेट लाइफ को अलविदा कह स्पोर्ट्स में कदम: सृष्टि पांडे का शुरुआती जीवन और शूटिंग का फैसला
सृष्टि पांडे की जिंदगी अन्य सामान्य युवाओं की तरह ही आरामदायक ढर्रे पर चल रही थी। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में अच्छी सैलरी वाली नौकरी कर रही थीं। हालांकि, उनके मन के किसी कोने में देश के लिए खेल के मैदान में कुछ बड़ा करने का जज्बा हमेशा हिलोरें मार रहा था। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी खुद को कमजोर नहीं समझा। साल 2023 में उन्होंने एक बड़ा और बेहद जोखिम भरा फैसला लेते हुए अपनी कॉरपोरेट जॉब से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले पर शुरुआत में परिजनों और परिचितों को थोड़ा संशय जरूर हुआ, लेकिन सृष्टि का लक्ष्य पूरी तरह से स्पष्ट था। उन्होंने पेशेवर रूप से निशानेबाजी (Para Shooting) को अपने करियर के रूप में चुनने का पक्का इरादा कर लिया था।
#1 पहली बार पिस्टल पकड़ी और रचा इतिहास: डेब्यू नेशनल इवेंट में ही जीता स्वर्णिम पदक
बिना किसी पूर्व व्यावसायिक पृष्ठभूमि के शूटिंग रेंज में उतरना आसान नहीं था। 2023 के शुरुआती महीनों में जब सृष्टि ने पहली बार शूटिंग अकादमी में कदम रखा और हाथ में 10 मीटर एयर पिस्टल पकड़ी, तो उनके कोच ने भी उनके भीतर एक जन्मजात प्रतिभा और एकाग्रता को पहचान लिया। दिन में 6 से 8 घंटे की कड़ी मेहनत, सांसों के नियंत्रण का अभ्यास और सटीक निशानेबाजी के घंटों रियाज के बाद वे अपने पहले राष्ट्रीय स्तर के कॉम्पिटिशन में उतरीं। अपने डेब्यू इवेंट में ही दुनिया भर के अनुभवी निशानेबाजों को पीछे छोड़ते हुए सृष्टि पांडे ने निशाने पर सटीक प्रहार किया और सीधे गोल्ड मेडल (Gold Medal) अपने नाम कर लिया। इस अभूतपूर्व सफलता ने भारतीय शूटिंग जगत के दिग्गजों का ध्यान उनकी तरफ खींचा।
#1 एशियन पैरा गेम्स में भारत का मान बढ़ाया: एशियन मंच पर मेडल जीतकर तिरंगा फहराया
डेब्यू में ही स्वर्ण पदक जीतने के बाद सृष्टि का चयन भारतीय पैरा शूटिंग टीम में हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय कोचिंग कैंप में अपने कौशल को और अधिक निखारा तथा एशियन पैरा गेम्स (Asian Para Games) के क्वालीफाइंग राउंड्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय दल में अपनी जगह पक्की की। अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज पर दबाव के बावजूद सृष्टि के हाथ नहीं कांपे। कड़े और रोमांचक मुकाबले में उन्होंने एक-एक शॉट पूरी एकाग्रता के साथ दागा और पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। एशियन पैरा गेम्स के पोडियम पर खड़े होकर जब देश का राष्ट्रगान बजा, तो सृष्टि की आँखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर ऐतिहासिक जीत का गर्व साफ देखा जा सकता था।
#1 सफलता की राह में चुनौतियां और कड़ी ट्रेनिंग: जानिए कैसे मिली मानसिक और शारीरिक मजबूती
पैरा शूटिंग एक ऐसा खेल है जिसमें केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि अत्यधिक मानसिक शांति, एकाग्रता और धैर्य की आवश्यकता होती है। नौकरी छोड़कर अचानक एक नए खेल को अपनाना मानसिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण था। सृष्टि बताती हैं कि पिस्टल थामने के शुरुआती दिनों में कलाई और कंधों पर भारी तनाव आता था, लेकिन फिजियोथेरेपी और कड़े शारीरिक व्यायाम की मदद से उन्होंने अपनी क्षमता को बढ़ाया। इसके साथ ही ध्यान (Meditation) और विजुअलाइजेशन तकनीकों ने उन्हें दबाव वाले क्षणों में शांत रहने में मदद की। उनकी यह कड़ी मेहनत और अनुशासित दिनचर्या ही थी जिसके दम पर वे इतने कम समय में सफलता की बुलंदियों पर पहुंच सकीं।
#1 आने वाले पैरालिंपिक पर नजर: जानिए देश की इस स्वर्णिम निशानेबाज का अगला बड़ा लक्ष्य
एशियन पैरा गेम्स में मिली इस शानदार सफलता के बाद अब सृष्टि पांडे का अगला और सबसे बड़ा सपना पैरालिंपिक खेलों (Paralympics) में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। वे वर्तमान में आगामी विश्व कप और अंतरराष्ट्रीय क्वालीफाइंग टूर्नामेंट्स के लिए कड़ा अभ्यास कर रही हैं। सृष्टि का मानना है कि यदि आपके इरादे पक्के हों और मेहनत में ईमानदारी हो, तो कोई भी शारीरिक अक्षमता या उम्र की सीमा आपके सपनों के आड़े नहीं आ सकती। वे आज देश की हजारों लड़कियों के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं जो अपनी जिंदगी में लीक से हटकर कुछ नया और बड़ा करने का जज्बा रखती हैं।