IND vs WI सीरीज से करोड़ों की कमाई, लेकिन वेस्टइंडीज को नहीं मिलेगा एक पैसा

IND vs WI सीरीज से करोड़ों की कमाई, लेकिन वेस्टइंडीज को नहीं मिलेगा एक पैसा

क्रिकेट की दुनिया में जब भी भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच कोई द्विपक्षीय सीरीज या मुकाबला खेला जाता है, तो स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भर जाते हैं, टीवी पर करोड़ों लोग मैच देखते हैं और ब्रॉडकास्टिंग तथा विज्ञापनों के जरिए पैसों की ऐसी नदियां बहती हैं कि बीसीसीआई (BCCI) और मेजबान बोर्ड मालामाल हो जाते हैं। लेकिन इस चमकदार और चकाचौंध से भरी दुनिया के पीछे एक ऐसा कड़वा, चौंकाने वाला और दर्दनाक सच छिपा है जिसे सुनकर क्रिकेट प्रेमी हैरान रह जाएंगे। भारत के साथ होने वाली इस हाई-प्रोफाइल सीरीज से सैकड़ों करोड़ रुपये की भारी-भरकम कमाई होने के बावजूद वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड (CWI) के हिस्से में एक भी पैसा नहीं आने वाला है। कैरेबियाई क्रिकेट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने इस बात का खुलासा करते हुए अपना दर्द और अपनी आर्थिक लाचारी दुनिया के सामने खुलकर बयां की है। आइए एक खेल और बिजनेस रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस पूरे वित्तीय संकट और क्रिकेट के वित्तीय समीकरण के पीछे की असल इनसाइड स्टोरी क्या है।

वेस्टइंडीज क्रिकेट की चमकती दुनिया और अंदरखाने चल रहा गहरा वित्तीय संकट

एक समय था जब वेस्टइंडीज की टीम विश्व क्रिकेट पर राज करती थी और उनके खिलाड़ियों का खौफ पूरी दुनिया के बल्लेबाजों और गेंदबाजों के मन में समाया रहता था। लेकिन समय के पहिए के साथ-साथ कैरेबियाई क्रिकेट का स्वर्णिम काल पीछे छूट गया और आज उनका बोर्ड गंभीर वित्तीय संकट (Financial Crisis) के दौर से गुजर रहा है। आज स्थिति यह है कि खिलाड़ियों को समय पर वेतन देने, घरेलू क्रिकेट का संचालन करने और बुनियादी क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भी वेस्टइंडीज बोर्ड को दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता है या लोन लेना पड़ता है। ऐसे में जब भारत के साथ सीरीज होती है, तो हर आम इंसान यही सोचता है कि इस अरबों-खरबों की इंडस्ट्री से कैरेबियाई बोर्ड की झोली भी पैसों से भर जाती होगी। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है, जो खेल जगत के सबसे बड़े विडंबनाओं में से एक मानी जाती है।

क्यों नहीं मिलता वेस्टइंडीज बोर्ड को भारत के साथ होने वाली सीरीज का एक भी पैसा?

इस हैरान करने वाले वित्तीय समीकरण के पीछे इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के राजस्व वितरण के नियम और द्विपक्षीय सीरीज के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स (Broadcasting Rights) का मॉडल जिम्मेदार है। वर्तमान कमर्शियल समझौतों के नियमों के अनुसार, जब भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर जाती है या वेस्टइंडीज की टीम भारत आती है, तो उस सीरीज के टीवी अधिकार, डिजिटल स्ट्रीमिंग राइट्स और विज्ञापनों से होने वाली बंपर कमाई का अधिकांश हिस्सा मेजबान देश के बोर्ड के पास जाता है। जब सीरीज भारत में होती है, तो सारा मुनाफा बीसीसीआई की झोली में जाता है, और जब सीरीज वेस्टइंडीज में होती है, तो भी वहां के लोकल ब्रॉडकास्टिंग राइट्स के सौदे इतने कम दाम पर बिकते हैं कि वे बीसीसीआई या अन्य अमीर बोर्ड्स के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरा के समान होते हैं। वेस्टइंडीज बोर्ड के सीईओ ने दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके पास विज्ञापनों और ग्लोबल मीडिया राइट्स से मिलने वाले उन करोड़ों रुपयों तक सीधी पहुंच ही नहीं होती, जो भारत में इस सीरीज के दौरान कमाए जाते हैं।

सीईओ का छलका दर्द: 'हम सिर्फ मेहमान बनकर रह जाते हैं, मुनाफा कोई और ले जाता है'

वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के सीईओ ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने दिल का गुबार निकालते हुए कहा कि कैरेबियाई क्रिकेट आज जिस बदहाली से गुजर रहा है, उसमें वैश्विक क्रिकेट राजस्व का असमान वितरण बहुत बड़ा कारण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भारत जैसी विशाल और आर्थिक रूप से सबसे ताकतवर क्रिकेट टीम के साथ उनके खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाते हैं और पूरी दुनिया में रिकॉर्ड तोड़ व्यूअरशिप मिलती है, तो बोर्ड को केवल अपनी बुनियादी लागत निकालने लायक ही पैसे मिल पाते हैं। दुनिया भर में जब इस सीरीज से करोड़ों की कमाई होती है, तो वेस्टइंडीज के क्रिकेट फैंस यह उम्मीद करते हैं कि उनका बोर्ड अमीर हो रहा होगा, लेकिन हकीकत में खिलाड़ियों की मैच फीस चुकाना तक मुश्किल हो जाता है। सीईओ का यह बयान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बिरादरी में एक बहुत बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है कि क्या अमीर बोर्ड्स को गरीब और संघर्ष कर रहे क्रिकेट बोर्ड्स की आर्थिक मदद के लिए आगे नहीं आना चाहिए।

वैश्विक क्रिकेट में अमीर और गरीब बोर्ड्स की खाई: क्या भविष्य में सुधरेंगे हालात?

क्रिकेट जगत के जानकारों का मानना है कि यदि वेस्टइंडीज, श्रीलंका, जिम्बाब्वे और आयरलैंड जैसे ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण क्रिकेट बोर्ड्स को इस तरह की आर्थिक तंगी से नहीं उबारा गया, तो आने वाले समय में टेस्ट क्रिकेट और द्विपक्षीय सीरीज का रोमांच खत्म हो जाएगा। आज के दौर में युवा खिलाड़ी पैसों की चमक-धमक देखकर टी20 लीग्स की तरफ ज्यादा भाग रहे हैं, क्योंकि राष्ट्रीय बोर्ड उन्हें वो वित्तीय सुरक्षा देने में असमर्थ हैं। भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले मुकाबलों से जो बे,हिसाब मुनाफा कमाया जाता है, उसका एक न्यायसंगत हिस्सा यदि कैरेबियाई क्रिकेट के विकास और वहां की युवा प्रतिभाओं को तराशने में लगाया जाए, तो वेस्टइंडीज क्रिकेट फिर से अपने पुराने गौरव को हासिल कर सकता है। फिलहाल, सीईओ के इस दर्द भरे खुलासे ने क्रिकेट बोर्ड्स के बीच रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल को लेकर एक बार फिर से सुगबुगाहट तेज कर दी है, जिस पर आने वाले समय में आईसीसी की बैठकों में बड़ी चर्चा होने की पूरी संभावना है।