BCCI की हाई-प्रोफाइल मीटिंग में मचेगा घमासान: अजीत अगरकर और वीवीएस लक्ष्मण के बीच फिटनेस मुद्दों पर तीखी भिड़ंत की आशंका
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के गलियारों में इस समय हलचल काफी तेज हो चुकी है और मुंबई में होने जा रही आगामी उच्च स्तरीय बैठक भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित होने वाली है। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों की निगाहें पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों और चयनकर्ताओं के बीच होने वाली इस चर्चा के दौरान क्या-क्या खुलासे सामने आएंगे। हाल के महीनों में टीम इंडिया के निराशाजनक प्रदर्शन, खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़ी गंभीर समस्याओं और रिहैब प्रक्रिया को लेकर अंदरखाने जो नाराजगी चल रही थी, वह अब इस बैठक में पूरी तरह से खुलकर सामने आ सकती है। भारतीय क्रिकेट टीम के चयन मामलों, हालिया दौरों पर मिली हार और खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने जैसी जटिल परिस्थितियों के बीच यह बैठक कई मायनों में हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण और हेड कोच गौतम गंभीर जैसे दिग्गज जब एक मंच पर आमने-सामने होंगे, तो तीखे सवाल-जवाब होना लाजिमी है। बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल समीक्षा करना नहीं है, बल्कि भविष्य की रणनीतियों के लिए कड़े और कड़े फैसले लेना भी है।
मुंबई में होने वाली BCCI की अहम बैठक और टीम इंडिया के प्रदर्शन की समीक्षा
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा आगामी गुरुवार को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई है, जिसमें भारतीय क्रिकेट से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया, सीनियर पुरुष चयन समिति के चेयरमैन अजीत अगरकर, टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर और बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (पूर्व में नेशनल क्रिकेट अकादमी) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के शामिल होने की पूरी संभावना है। इस बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु टीम इंडिया के हालिया विदेशी दौरों, विशेषकर आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए मुकाबलों में टीम का निराशाजनक प्रदर्शन रहेगा। आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में मिली शर्मनाक हार और इंग्लैंड दौरे पर टी20 श्रृंखला में टीम के लचर प्रदर्शन को लेकर हेड कोच गौतम गंभीर से कड़े सवाल पूछे जा सकते हैं। टीम मैनेजमेंट से यह स्पष्ट रूप से जवाब मांगा जा सकता है कि आखिर इन दोनों महत्वपूर्ण दौरों पर भारतीय टीम से रणनीतिक स्तर पर कहां-कहां चूक हुई और आने वाले समय में होने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों से पहले इन कमियों को दूर करने के लिए उनके पास क्या ठोस एक्शन प्लान है।
खिलाड़ियों की लगातार बढ़ती फिटनेस समस्याएं और अजीत अगरकर का गुस्सा
इस उच्च स्तरीय बैठक का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा संवेदनशील मुद्दा भारतीय खिलाड़ियों की लगातार खराब होती फिटनेस और बार-बार चोटिल होने की प्रवृत्ति रहेगा। पिछले कुछ समय से जिस तरह से एक के बाद एक स्टार खिलाड़ी इंजरी का शिकार हो रहे हैं और टीम में बार-बार अंतिम समय पर बदलाव या रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ रही है, उसने चयनकर्ताओं की रातों की नींद उड़ा रखी है। अंदरूनी सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार, चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर खिलाड़ियों की लगातार सामने आ रही फिटनेस समस्याओं और रिहैब से जुड़ी कार्यप्रणाली को लेकर खासे नाराज बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि मुंबई में होने वाली इस बैठक के दौरान अजीत अगरकर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के हेड वीवीएस लक्ष्मण के बीच खिलाड़ियों की फिटनेस क्लीयरेंस के मुद्दे पर तीखी चर्चा और घमासान देखने को मिल सकता है। मुख्य सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब कोई खिलाड़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लंबी रिहैब प्रक्रिया और फिटनेस टेस्ट से गुजरने के बाद मैदान पर लौटता है, तो वह तुरंत दोबारा चोटिल क्यों हो जाता है। जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, वाशिंगटन सुंदर, नितीश कुमार रेड्डी और हार्दिक पांड्या जैसे प्रमुख खिलाड़ियों की बार-बार होने वाली इंजरी ने भारतीय टीम मैनेजमेंट और चयन समिति के बीच तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हार्दिक पांड्या की फिटनेस पर उठेंगे गंभीर सवाल और रिकवरी में देरी की वजह
इस पूरी फिटनेस बहस के केंद्र में स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या का मामला सबसे ज्यादा अहम रहने की उम्मीद है। पिछले कुछ समय से हार्दिक की फिटनेस भारतीय टीम के लिए लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले साल जून में अफगानिस्तान के खिलाफ खेली जाने वाली वनडे सीरीज के लिए जब हार्दिक पांड्या का नाम भारतीय टीम में चुना गया था, तब उनका यह चयन पूरी तरह से उनकी फिटनेस क्लीयरेंस के अधीन था। हालांकि, बाद में क्वाड्रिसेप्स की गंभीर चोट के चलते उन्हें अंतिम समय में उस सीरीज से बाहर होना पड़ गया था। इसके बाद से उनकी रिकवरी की गति और फिटनेस हासिल करने में लग रहे लंबे समय को लेकर चयनकर्ताओं के मन में तमाम सवाल सुलग रहे हैं। बैठक में यह कड़ा सवाल उठाया जा सकता है कि आखिर उनकी रिकवरी प्रक्रिया में लगातार इतनी देरी क्यों हो रही है और उन्हें पूरी तरह से मैच फिट होने में इतना लंबा वक्त क्यों लग रहा है। यही वजह है कि उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज के लिए भी भारतीय टीम में शामिल नहीं किया गया है। केवल हार्दिक ही नहीं, बल्कि युवा ऑलराउंडर नितीश कुमार रेड्डी और अन्य कई खिलाड़ियों के साथ भी फिटनेस का यही अनिश्चित दौर लगातार बना हुआ है, जिसके चलते चयन समिति अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से मिलने वाले क्लीयरेंस पर पूरी तरह से पारदर्शिता चाहती है।
अफगानिस्तान के खिलाफ T20 सीरीज में चार खिलाड़ी 'Subject to Fitness' क्यों?
चयन समिति और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच चल रहे इस मतभेद को और अधिक हवा तब मिली जब हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी तीन मैचों की महत्वपूर्ण टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया गया। इस टीम में चयनकर्ताओं ने जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, वाशिंगटन सुंदर और नितीश कुमार रेड्डी जैसे मैच विनर खिलाड़ियों को तो शामिल कर लिया, लेकिन इन चारों की अंतिम उपलब्धता पूरी तरह से उनकी फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर यानी 'Subject to Fitness' रखी गई है। इसी एक फैसले ने चयन समिति के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर एक ही सीरीज के लिए एक साथ चार-चार खिलाड़ियों को इस संदिग्ध शर्त पर चुनने की नौबत क्यों आन पड़ी? क्या खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और फिटनेस को लेकर चयनकर्ताओं और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच संवाद और तालमेल की भारी कमी है? यदि कोई खिलाड़ी अभी सौ प्रतिशत पूरी तरह से फिट नहीं है, तो उसके चयन को लेकर अंतिम फैसला लेने का आधार क्या होना चाहिए और क्या जल्दबाजी में लिए गए फैसले टीम के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं? इन तमाम तीखे सवालों के जवाब इस बैठक में वीवीएस लक्ष्मण और टीम मैनेजमेंट को देने पड़ सकते हैं।
वीवीएस लक्ष्मण की रिहैब प्रक्रिया और रिटर्न-टू-प्ले प्रोटोकॉल पर होगी लंबी चर्चा
दूसरी तरफ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण पहले ही खिलाड़ियों की रिहैब और फिटनेस प्रक्रिया को लेकर अपनी कार्यप्रणाली को विस्तार से सबके सामने रख चुके हैं। लक्ष्मण के अनुसार, जब भी कोई राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी चोटिल होता है, तो पूरी प्रक्रिया उसकी चोट की सटीक पहचान से शुरू होती है और विभिन्न चरणों से गुजरते हुए 'रिटर्न-टू-प्ले' यानी प्रतिस्पर्धी मुकाबलों में उतरने के बाद उसे आधिकारिक तौर पर पूरी तरह फिट घोषित किए जाने तक चलती है। इसके बावजूद, मैदानी स्तर पर खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने की घटनाओं ने इस पूरी स्थापित प्रक्रिया और इसके मानकों पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। चयनकर्ताओं की सबसे बड़ी व्यावहारिक परेशानी यह है कि जब कोई मुख्य खिलाड़ी अचानक मैच से पहले चोटिल हो जाता है, तो उन्हें मजबूरन सीरीज के बीच में से ही रिप्लेसमेंट का ऐलान करना पड़ता है, जिससे न केवल टीम का गेंदबाजी और बल्लेबाजी संयोजन पूरी तरह से बिखर जाता है, बल्कि महत्वपूर्ण मैचों में रणनीतिक योजनाएं भी धरी की धरी रह जाती हैं। यही मुख्य वजह है कि गुरुवार को होने वाली यह हाई-लेवल बैठक केवल कुछ मैचों में हार की समीक्षा तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसमें भारतीय क्रिकेट के पूरे फिटनेस ढांचे, वर्कलोड मैनेजमेंट और रिहैब सेंटर्स की कार्यशैली पर गंभीर मंथन होगा।