फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 56 का तूफानी औसत और 24 मैचों में ठोक डाले 8 शतक; तिलक वर्मा ने ठोकी टीम इंडिया की मजबूत दावेदारी
भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इस वक्त अगर किसी युवा खिलाड़ी के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह हैं मध्यक्रम के भरोसेमंद और स्टाइलिश बल्लेबाज तिलक वर्मा। सीमित ओवरों के क्रिकेट और आईपीएल में अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी का लोहा मनवाने वाले तिलक ने अब लाल गेंद के क्रिकेट यानी फर्स्ट क्लास फॉर्मेट में भी तहलका मचा दिया है। उन्होंने रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू मुकाबलों में अपने दमदार प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि वे केवल छोटे फॉर्मेट के खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट की लंबी और मुश्किल पिचों पर भी अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाने के पूरी तरह काबिल हैं। हाल ही में उनके बल्ले से निकले रनों के सैलाब ने चयनकर्ताओं और क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जिसके बाद से देश भर के खेल विशेषज्ञ यह कयास लगाने लगे हैं कि बहुत जल्द यह युवा सितारा भारतीय टेस्ट जर्सी पहनकर मैदान पर उतरता हुआ नजर आ सकता है।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 56 का शानदार औसत और 24 मैचों में 8 शतकों का रिकॉर्ड
तिलक वर्मा के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि रेड बॉल क्रिकेट में उनकी महारत किस उच्च स्तर की है। उन्होंने अपने अब तक के फर्स्ट क्लास करियर में बेहद निरंतरता के साथ रन बनाए हैं, जिसके चलते उनका औसत प्रभावशाली रूप से 56 के आसपास बना हुआ है। केवल 24 मैचों के अपने छोटे से सफर में ही उन्होंने 8 शानदार शतक जड़कर यह दिखा दिया है कि वे बड़ी पारियां खेलने का हुनर अच्छी तरह जानते हैं। जब टीम संकट में होती है या जब पिच पर गेंदबाजों को मदद मिल रही होती है, तब तिलक का संयम और डिफेंसिव तकनीक देखने लायक होती है। घरेलू टूर्नामेंट्स में उनका यह डोमिनेंस इस बात का प्रमाण है कि वे भारतीय टेस्ट टीम के मिडिल ऑर्डर की रीढ़ बनने की पूरी क्षमता रखते हैं, खासकर तब जब सीनियर खिलाड़ियों के बाद टीम में युवा और प्रतिभाशाली खून की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।
आधुनिक तकनीक और संयम का अद्भुत मेल, टेस्ट प्रारूप के लिए पूरी तरह तैयार हैं तिलक
आधुनिक क्रिकेट में अक्सर यह माना जाता है कि जो खिलाड़ी टी-20 और आईपीएल में तेज गति से रन बनाता है, वह टेस्ट क्रिकेट के लंबे सत्रों और रक्षात्मक खेल में संघर्ष कर सकता है। लेकिन तिलक वर्मा ने इस मिथक को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया है। क्रीज पर टिककर खेलने की उनकी क्षमता, गेंदबाजों की लाइन और लेंथ को पढ़ने का गजब का धैर्य तथा खराब गेंदों को बाउंड्री के पार भेजने की कला उन्हें एक पूर्ण बल्लेबाज बनाती है। लाल गेंद के खिलाफ खेलते हुए वे क्रीज पर पैर जमाकर खेलना पसंद करते हैं और जरूरत पड़ने पर स्ट्राइक रेट को नियंत्रित करना भी अच्छी तरह जानते हैं। घरेलू सर्किट में उन्होंने जिस तरह से स्पिन और तेज गेंदबाजों दोनों का डटकर मुकाबला किया है, उससे यह साफ हो जाता है कि वे विदेशी दौरों और चुनौतीपूर्ण पिचों पर भारतीय टेस्ट बल्लेबाजी क्रम को मजबूती प्रदान करने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार हैं।
चयनकर्ताओं की नजरों में चढ़े तिलक वर्मा, आगामी टेस्ट सीरीज में मिल सकता है बड़ा मौका
जैसे-जैसे भारतीय टेस्ट टीम के संयोजन में बदलाव और भविष्य की पीढ़ी तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है, वैसे-वैसे तिलक वर्मा का नाम चयन समिति की बैठकों में सबसे ऊपर आता जा रहा है। राष्ट्रीय टीम के कोच और चयनकर्ता घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले युवाओं पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में तिलक का यह धमाकेदार फॉर्म उन्हें बाकी दावेदारों से काफी आगे खड़ा कर देता है। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि यदि वह इसी लय को आने वाले मुकाबलों में भी जारी रखते हैं, तो आगामी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट श्रृंखलाओं के लिए उन्हें भारतीय स्क्वॉड में शामिल किए जाने की पूरी संभावना है। टीम मैनेजमेंट भी ऐसे खिलाड़ियों की तलाश में रहता है जो विदेशी पिचों की बाउंस और स्विंग को झेल सकें, और तिलक की तकनीक इन सभी पैमानों पर खरी उतरती हुई दिखाई दे रही है।
भारतीय मध्यक्रम के भविष्य की नई उम्मीद और समर्थकों की जगी बड़ी उम्मीदें
भारतीय टेस्ट टीम में चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य రహाने जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के हटने के बाद से मिडिल ऑर्डर में एक खालीपन सा महसूस होने लगा था, जिसे भरने के लिए युवा बल्लेबाजों को मौके दिए जा रहे हैं। ऐसे में तिलक वर्मा का यह उभरता हुआ रूप भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी बड़ी उम्मीद से कम नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर खेल विशेषज्ञों के मंचों तक हर जगह उनकी तकनीक और रन बनाने की भूख की सराहना की जा रही है। फैंस को पूरी उम्मीद है कि जिस तरह उन्होंने कम उम्र में अपनी अलग पहचान बनाई है, उसी तरह वे टेस्ट क्रिकेट में भी लंबी पारी खेलेंगे और भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाएंगे। घरेलू मैदानों पर पसीना बहाने वाला यह युवा बल्लेबाज अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरने के लिए बिल्कुल बेकरार नजर आ रहा है, और क्रिकेट जगत की निगाहें अब इसी बात पर टिकी हैं कि चयनकर्ता उन्हें कब और किस सीरीज में पहली बार टेस्ट कैप सौंपते हैं।