13 साल का सूखा खत्म! ईशान किशन के दोहरे शतक और शानदार बल्लेबाजी के दम पर ईस्ट जोन ने जीता ऐतिहासिक दुलीप ट्रॉफी का खिताब
भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स में शुमार दुलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में इस बार पूर्वी क्षेत्र यानी ईस्ट जोन की टीम ने ऐसा धमाकेदार और अजेय प्रदर्शन किया जिसने भारतीय क्रिकेट गलियारों में एक बार फिर से सनसनी फैला दी है। चेन्नई के ऐतिहासिक एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेले गए इस रोमांचक और निर्णायक खिताबी मुकाबले में ईस्ट जोन ने दक्षिणी क्षेत्र यानी साउथ जोन की मजबूत टीम पर पूरी तरह से अपना दबदबा बनाते हुए 13 साल के लंबे सूखे को आखिरकार समाप्त कर दिया। आखिरी बार साल 2012-13 के घरेलू सीज़न में दुलीप ट्रॉफी की चमक देखने वाली ईस्ट जोन की टीम ने इस बार कप्तान ईशान किशन के नेतृत्व में मैदान पर उतरकर अपने शानदार खेल और जुझारूपन से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही पूर्वी क्षेत्र की टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि घरेलू क्रिकेट में उनकी प्रतिभा और क्षमता का स्तर किस ऊंचाई पर है, जिसे आने वाले समय में राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के लिए नजरअंदाज करना बिल्कुल भी आसान नहीं होगा।
कप्तान ईशान किशन का धमाकेदार दोहरा शतक और कुल 350 रनों की लाजवाब पारी
इस खिताबी मुकाबले की सबसे बड़ी और चमकदार कहानी भारतीय टीम के विस्फोटक विकेटकीपर-बल्लेबाज और ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन के बल्ले से लिखी गई। ईशान किशन ने अपनी शानदार और जिम्मेदार कप्तानी पारी के दौरान फाइनल मैच में कुल मिलाकर लगभग 350 रन बनाते हुए मैदान पर तहलका मचा दिया। चेन्नई की मुश्किल पिच पर उन्होंने पहली पारी में अद्भुत बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए शानदार 270 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली, जिसने साउथ जोन के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा कर रख दीं। उनके इस दोहरे शतक की बदौलत ही ईस्ट जोन ने अपनी पहली पारी में विशालकाय 708 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा कर दिया, जो मैच का पासा पलटने के लिए पूरी तरह से काफी था। इसके अलावा इस बड़ी पारी में अन्य युवा बल्लेबाजों ने भी उनका पूरा साथ दिया, जिसमें कुमार कुशाग्रा ने अपनी बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 101 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जबकि सलामी बल्लेबाज शिखर मोहन ने भी बेहद सूझबूझ दिखाते हुए 85 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया।
साउथ जोन की पहली पारी 336 रनों पर सिमटी, मुकेश कुमार और मोहम्मद शमी की घातक गेंदबाजी
ईस्ट जोन द्वारा पहली पारी में खड़े किए गए 708 रनों के विशाल स्कोर के दबाव तले दक्षिणी क्षेत्र यानी साउथ जोन की पूरी बल्लेबाजी क्रम बुरी तरह बिखर गई और उनकी पूरी टीम पहली पारी में मात्र 336 रन बनाकर ही सिमट गई। इस प्रकार पहली पारी के आधार पर ईस्ट जोन को 372 रनों की एक ऐसी भारी-भरकम और अजेय बढ़त हासिल हो गई, जिसने मैच के परिणाम को लगभग तय कर दिया था। साउथ जोन के बल्लेबाजों को रोकने के लिए ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। टीम के अनुभवी और धारदार तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने अपनी स्विंग और सटीकता का जलवा बिखेरते हुए 3 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए, जबकि भारत के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी, हरफनमौला खिलाड़ी कौनाइन कुरैशी और शिखर ने अपनी किफायती गेंदबाजी से दो-दो विकेट झटककर विरोधी टीम की कमर तोड़ दी। साउथ जोन के गेंदबाजों पर इस पूरे मैच के दौरान काम का अत्यधिक बोझ साफ नजर आया, क्योंकि पहली पारी में उन्हें 163 लंबे ओवर फेंकने पड़े थे, जिससे वे शारीरिक रूप से काफी थके हुए नजर आए।
कौनाइन कुरैशी का ऐतिहासिक नाबाद शतक और अनुकूल रॉय के साथ रिकॉर्ड साझेदारी
मैच के पांचवें और अंतिम दिन जब खेल आगे बढ़ा तो ईस्ट जोन ने अपनी पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल होने के बावजूद पारी तुरंत घोषित करने के बजाय अपनी बल्लेबाजी जारी रखी और विपक्षी टीम को पूरी तरह से मैच से बाहर करने का फैसला किया। इसी दौरान ऑलराउंडर कौनाइन कुरैशी ने प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) क्रिकेट के इतिहास में अपने करियर का सबसे यादगार और ऐतिहासिक शतक जड़ दिया। कुरैशी ने बेहद शानदार बल्लेबाजी करते हुए 189 गेंदों का सामना किया और 116 रनों की नाबाद पारी खेली, जिसमें 13 शानदार चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। उनका यह शतक टीम के लिए संकटमोचन साबित हुआ। इसके साथ ही, 64 रनों की तेजतर्रार पारी खेलने वाले अनुकूल रॉय के साथ उनकी साझेदारी ने ईस्ट जोन की कुल बढ़त को 700 रनों के आंकड़े से भी पार पहुंचा दिया। इस लंबी बल्लेबाजी के दौरान कप्तान ईशान किशन ने भी दूसरी पारी में हाथ खोलते हुए 80 रनों की तेज पारी खेली और रेड-बॉल क्रिकेट यानी लाल गेंद के खेल में अपनी बेहतरीन फॉर्म और तकनीकी क्षमता का एक बार फिर से लोहा मनवाया।
साउथ जोन की रणनीति फेल, त्रिपूर्णा विजय के पांच विकेट और खिलाड़ियों का जश्न
मैच के दौरान साउथ जोन की टीम ने अपनी तरफ से हर संभव रणनीतिक पैंतरे अपनाने की कोशिश की, जिसमें उनके खेमे में स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज की वापसी भी शामिल थी, लेकिन इसके बावजूद उनकी कोई भी योजना मैदान पर काम नहीं आई और वे ईस्ट जोन के बल्लेबाजों को रोकने में पूरी तरह असफल रहे। त्रिपूर्णा विजय ने इस मैच में दोनों पारियों में शानदार गेंदबाजी करते हुए पांच-पांच विकेट अपने नाम किए और मैच के सबसे सफल गेंदबाजों में अपनी जगह पक्की की, लेकिन टीम को हार से नहीं बचा सके। अंततः पांचवें दिन जब ईस्ट जोन ने अपनी विशाल पारी घोषित की, तो साउथ जोन के पास मैच का समय समाप्त होने के कारण पहली पारी की विशाल पिछड़त की भरपाई करने का कोई भी मौका नहीं बचा था। स्थिति को भांपते हुए दोनों टीमों के कप्तानों ने आपस में हाथ मिलाया और मैच को ड्रॉ घोषित कर दिया, जिसके बाद नियमों के तहत पहली पारी की बढ़त के आधार पर ईस्ट जोन को विजेता घोषित कर दिया गया। विजेता का फैसला होते ही कप्तान ईशान किशन और उनके साथी खिलाड़ी मैदान पर खुशी से झूम उठे और स्टंप हाथ में लेकर नाचते हुए जीत का जश्न मनाने लगे।