5 साल में 11 कोच, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का अजीब कारनामा: ताबड़तोड़ बदलावों के बाद भी तलाश रहे जीत, देखिए पूरी लिस्ट
क्रिकेट की दुनिया में पाकिस्तान क्रिकेट टीम और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की कार्यशैली हमेशा से ही किसी दिलचस्प ड्रामे से कम नहीं रही है। मैदान पर टीम का प्रदर्शन कैसा भी रहे, लेकिन उससे भी ज्यादा चर्चा पीसीबी के बोर्ड रूम में होने वाले उलटफेरों और कोचों की विदाई को लेकर होती है। पिछले पांच वर्षों के छोटे से अंतराल में पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने कुल 11 बार अपने हेड कोच या मार्गदर्शकों को बदला है। स्थिति यह हो गई है कि पीसीबी का मुख्य कोच पद किसी 'म्यूजिकल चेयर' (Musical Chair) यानी संगीतमय कुर्सी की तरह बन गया है, जहां कोई भी हस्ती लंबे समय तक टिक नहीं पाती है। टीम की खराब हार के तुरंत बाद जिस तरह से कोचों को बर्खास्त किया जाता है और उन्हें सरेआम अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है, उसने पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों को हैरान कर दिया है। आज के इस विस्तृत और गहराई से विश्लेषण वाले लेख में हम पिछले पांच सालों में पाकिस्तान क्रिकेट द्वारा बदले गए 11 कोचों की पूरी सूची, बोर्ड की अस्थिर नीतियों और इस लगातार जारी उठापटक के हर एक पहलू पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आप इस बड़ी खेल खबर से पूरी तरह वाकिफ हो सकें।
क्या है पाकिस्तान क्रिकेट का 'कोच बदलने का रिकॉर्ड' और क्यों बनता जा रहा है यह एक मजाक
जब भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किसी राष्ट्रीय टीम की हार होती है, तो क्रिकेट बोर्ड अपनी कमियों को सुधारने के लिए योजनाएं बनाते हैं, लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड हर बार केवल 'पैनिक बटन' दबाकर सीधे कोच और खिलाड़ियों की बलि चढ़ाने का शॉर्टकट अपनाता है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मिकी आर्थर से लेकर मिस्बाह-उल-हक, साकलैन मुश्ताक, ग्रांट ब्रैडबर्न, मोहम्मद हफीज, जेसन गिब्सन, अकिब जावेद, अजहर महमूद और हाल ही में सरफराज अहमद तक—न जाने कितने ही बड़े और प्रतिष्ठित नाम इस कुर्सी पर आए और कुछ ही महीनों के भीतर बोर्ड की गाज गिरने के बाद बाहर का रास्ता देख चुके हैं। किसी भी टीम को एक स्थाई और मजबूत दिशा देने के लिए एक कोच को कम से कम दो-तीन साल का वक्त और पूरा भरोसा चाहिए होता है, लेकिन पीसीबी में हर सीरीज की हार के बाद नए कोच की तलाश शुरू कर दी जाती है, जिससे खिलाड़ियों के भीतर भी असुरक्षा की भावना घर कर जाती है।
पिछले 5 वर्षों में बदले गए 11 कोचों की पूरी सूची और उनका संक्षिप्त कार्यकाल
आइए नजर डालते हैं उस लंबी फेहरिस्त पर जो यह बताती है कि कैसे पिछले पांच सालों में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक के बाद एक कुल 11 कोचों और डायरेक्टर्स को बदला है और अंततः उन्हें असहज परिस्थितियों में पद छोड़ना पड़ा:
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मिकी आर्थर (Mickey Arthur): जिन्हें दोबारा डायरेक्टर और कोच के रूप में लाया गया था, लेकिन बोर्ड की आंतरिक राजनीति के चलते उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चल सका।
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मिस्बाह-उल-हक (Misbah-ul-Haq): जिन्होंने मुख्य कोच और चीफ सेलेक्टर दोनों की दोहरी जिम्मेदारी संभाली थी, लेकिन बढ़ते दबाव के कारण उन्होंने खुद ही पद छोड़ दिया।
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साकलैन मुश्ताक (Saqlain Mushtaq): जिन्हें पहले अंतरिम और फिर पूर्णकालिक कोच बनाया गया, लेकिन अनुबंध समाप्त होने पर उन्हें आगे मौका नहीं मिला।
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ग्रांट ब्रैडबर्न (Grant Bradburn): विदेशी कोच के रूप में लाए गए ब्रैडबर्न को भी टीम के खराब प्रदर्शन और बोर्ड के साथ मतभेदों के कारण अंततः पद से हटना पड़ा।
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मोहम्मद हफीज (Mohammad Hafeez): ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के मुश्किल दौरों पर टीम डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभालने वाले हफीज का कार्यकाल भी बेहद छोटा और असफल रहा।
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जेसन गिब्सन (Jason Gillespie): रेड-बॉल क्रिकेट के लिए बड़े उम्मीदों के साथ लाए गए इस ऑस्ट्रेलियाई पूर्व तेज गेंदबाज को भी बाद में बोर्ड के फैसलों से असंतुष्ट होकर बाहर होना पड़ा।
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अकिब जावेद (Aqib Javed): जिन्हें सीमित ओवरों और बाद में अंतरिम जिम्मेदारी दी गई, लेकिन वे भी इस कुर्सी की स्थिरता को नहीं बचा सके।
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अजहर महमूद (Azhar Mahmood): सहायक कोच की भूमिका से लेकर कार्यवाहक रेड-बॉल कोच तक का सफर तय करने वाले अजहर को भी टिकने का मौका नहीं मिला।
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सरफराज अहमद (Sarfaraz Ahmed): हाल ही में अपने खेल करियर से सीधे कोचिंग में कदम रखने वाले पूर्व कप्तान सरफराज को इंग्लैंड दौरे के शुरुआती झटकों के बाद ही बीच सीरीज में पद से हटाकर वापस भेज दिया गया।
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माइक हेसन (Mike Hesson): जिन्हें हाल ही में सफेद गेंद और अब टेस्ट फॉर्मेट की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
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अन्य अंतरिम और सहयोगी कोच: इस सूची में बीच-बीच में कई स्थानीय और विदेशी गेंदबाजों तथा बल्लेबाजों के कोच शामिल रहे जिन्हें रातों-रात बदला गया।
किस तरह से होती है दिग्गजों की बेइज्जत और क्यों खिलाड़ियों के साथ हो रहा है अन्याय
पाकिस्तान क्रिकेट इतिहास का यह सबसे काला पहलू रहा है कि यहां किसी भी बड़े खिलाड़ी या दिग्गज को विदाई बेहद अपमानजनक तरीके से दी जाती है। हालिया घटना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है जहां इंग्लैंड दौरे पर खराब प्रदर्शन के बाद हेड कोच सरफराज अहमद और सात खिलाड़ियों को बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे सोशल मीडिया के जरिए यह पता चला कि उन्हें सीरीज से बाहर कर दिया गया है और वे वतन लौटने के विमान में बैठ रहे हैं। खेल जानकारों और पूर्व क्रिकेटरों ने पीसीबी के इस तानाशाही रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि इस तरह रातों-रात खिलाड़ियों और कोचों को बेइज्जत करके वापस भेजना किसी भी पेशेवर बोर्ड की निशानी नहीं है। जब मैनेजमेंट इस तरह का डर और असुरक्षा का माहौल बनाएगा, तो मैदान पर खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने के बजाय अपनी कुर्सी बचाने की ही सोचते रहेंगे।
पाकिस्तानी क्रिकेट का भविष्य और इस अस्थिरता से बाहर निकलने की क्या है राह
यदि पाकिस्तान क्रिकेट को विश्व क्रिकेट में दोबारा अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस बुलानी है, तो पीसीबी को इस 'कोच बदलने की बीमारी' से जल्द से जल्द छुटकारा पाना होगा। बार-बार बोर्ड के चेयरमैन बदलने के साथ ही पूरी चयन समिति और कोचिंग स्टाफ को बदल देना किसी भी दीर्घकालिक योजना के लिए सबसे बड़ा जहर है। जब तक बोर्ड निष्पक्ष होकर कोच को पूरी प्रशासनिक स्वतंत्रता और पर्याप्त समय नहीं देगा, तब तक टीम का प्रदर्शन सुधरने वाला नहीं है। फैंस भी अब इस ड्रामा से ऊब चुके हैं और वे चाहते हैं कि मैदान पर चौके-छक्कों की गूंज सुनाई दे, न कि बोर्ड रूम के विवादों की। हम उम्मीद करते हैं कि यह विस्तृत रिपोर्ट आपको पाकिस्तान क्रिकेट की इस अनकही और हैरान करने वाली सच्चाई से पूरी तरह अवगत कराने में सफल रही होगी।