South Politics Heated : केरल CM ने बोला बुलडोजर राज, तो सिद्धारमैया और डीके ने कैसे निकाली हेकड़ी?
News India Live, Digital Desk : सियासत में एक पुरानी कहावत है दुश्मन का दुश्मन, दोस्त होता है।" लेकिन कर्नाटक में कुछ उल्टा ही देखने को मिला है। यहाँ जब घर (राज्य) की इज्जत पर बात आई, तो घर के दो 'प्रतिद्वंद्वी' भाई (सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार) एक हो गए और पड़ोसी को करारा जवाब दे डाला।
आज हम बात कर रहे हैं उसी 'बुलडोजर' की, जो अब उत्तर भारत (North India) से निकलकर दक्षिण की सड़कों पर धूल उड़ा रहा है। मुद्दा गर्म है, चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर बैंगलुरु से केरल तक ये शोर क्यों मच रहा है।
मामला क्या है? (What’s the Drama?)
कहानी बैंगलुरु के एक इलाके 'यलहंका' (Yelahanka) से शुरू होती है। वहां प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर चला दिया। खबर है कि यह जमीन कूड़ा फेंकने की जगह (dumping yard) थी, जिस पर झुग्गियां बना ली गई थीं। प्रशासन ने उन्हें हटा दिया।
अब यहाँ एंट्री होती है पड़ोसी राज्य केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Pinarayi Vijayan) की। विजयन साहब ने सोशल मीडिया पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिख मारा। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार "बुलडोजर संस्कृति" अपना रही है और गरीब मुसलमानों/अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही है। उन्होंने इसे "उत्तर भारत का मॉडल" कह दिया।
बस फिर क्या था! कांग्रेस शासित कर्नाटक को यह तुलना बिल्कुल रास नहीं आई।
सिद्धारमैया और शिवकुमार का 'डबल अटैक'
अक्सर खबरों में हम सुनते हैं कि सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। लेकिन विजयन के बयान ने इन दोनों को फेविकोल की तरह जोड़ दिया। दोनों ने मिलकर मोर्चा संभाला।
डीके शिवकुमार तो फुल आक्रामक मोड में नज़र आए। उन्होंने विजयन को खरी-खरी सुनाते हुए कहा, "अरे भाई! हम किसी जाति या धर्म को देखर बुलडोजर नहीं चला रहे। वो सरकारी जमीन है और वहां लोग कूड़े के ढेर पर रह रहे थे, जो उनकी सेहत के लिए ख़तरनाक था। आप पड़ोसी हैं, इसका मतलब ये नहीं कि बिना हकीकत जाने कुछ भी बोलेंगे।"
वहीं, सीएम सिद्धारमैया ने भी साफ़ कर दिया कि उनकी सरकार गरीबों के साथ है, लेकिन सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा नहीं चलने दिया जाएगा। उनका कहना था, "हमारे यहाँ 'बुलडोजर राज' नहीं चलता, ये सिर्फ़ क़ानूनी कार्रवाई थी। इसे बेवजह तूल न दें।"
क्या है 'इन्साइड स्टोरी'?
इस लड़ाई में दो बड़ी बातें निकल कर आती हैं:
- दक्षिण बनाम उत्तर का नैरेटिव: पिनाराई विजयन ने जानबूझकर "नॉर्थ इंडियन मॉडल" शब्द का इस्तेमाल किया। दक्षिण की राजनीति में यह एक संवेदनशील मुद्दा है। वो दिखाना चाहते थे कि कांग्रेस अब बीजेपी वाले तौर-तरीके अपना रही है।
- गठबंधन में दरार: मत भूलिए कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और लेफ्ट (विजयन की पार्टी) 'INDIA' गठबंधन में साथ-साथ हैं। लेकिन राज्यों में ये एक-दूसरे की टांग खींचने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
कर्नाटक के नेताओं का मैसेज एकदम क्लियर है— "अपना घर संभालिए, हमारे मामले में टांग न अड़ाएं।"
आम जनता का क्या?
सियासत अपनी जगह है, लेकिन उन परिवारों का दर्द भी असली है जिनके घर टूटे हैं। चाहे वो अतिक्रमण ही क्यों न हो, सिर से छत छिनना दुखद होता है। सरकार कह रही है कि वो पुनर्वास (Rehabilitation) का इंतजाम करेगी, लेकिन यह कितना और कब होगा, यह बड़ा सवाल है।
फिलहाल तो दक्षिण भारत की हवाओं में सियासी गर्मी बढ़ गई है। एक बुलडोजर ने दो राज्यों के रिश्तों में खटास ज़रूर डाल दी है।
आपकी राय मायने रखती है!
दोस्तों, आपको क्या लगता है? क्या केरल के सीएम का दूसरे राज्य के मामले में बोलना सही था? या फिर डीके शिवकुमार का गुस्सा जायज़ है? कमेंट करके ज़रूर बताएं, चर्चा जारी रहनी चाहिए!