आतंकियों का काल बनेंगे स्नो लेपर्ड्स जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तैयार किया स्पेशल SOG दस्ता

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News India Live, Digital Desk: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जंग अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। सीमा पार से घुसपैठ और ऊँची पहाड़ियों पर बनी प्राकृतिक गुफाओं में छिपे आतंकियों को ढेर करने के लिए पुलिस ने स्नो लेपर्ड्स (Snow Leopards) नाम से एक नया और घातक दस्ता तैयार किया है। ये कमांडो न केवल दुश्मन की गोली का जवाब देंगे, बल्कि शून्य से नीचे के तापमान (-20°C तक) में भी शिकार करने की ताकत रखते हैं।

कौन हैं 'स्नो लेपर्ड्स' और क्या है इनकी खासियत?

यह स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का एक विशिष्ट हिस्सा है, जिन्हें विशेष रूप से पीर पंजाल और मध्य कश्मीर की उन ऊंची चोटियों के लिए तैयार किया गया है जहाँ सामान्य सुरक्षा बलों का पहुँचना मुश्किल होता है।

कठोर ट्रेनिंग: इन कमांडोज को लेह-लद्दाख और कश्मीर की सबसे ठंडी जगहों पर ट्रेनिंग दी गई है। ये बर्फबारी और घने कोहरे के बीच भी 'अदृश्य' होकर हमला करने में माहिर हैं।

पर्वतारोहण में एक्सपर्ट: इन्हें ऊँचे पहाड़ों पर चढ़ने (Mountaineering) और बिना थके घंटों तक निगरानी करने की ट्रेनिंग दी गई है।

घातक हथियार: स्नो लेपर्ड्स को आधुनिक स्नाइपर राइफल्स, नाइट विजन डिवाइसेस और पोर्टेबल कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस किया गया है।

क्यों पड़ी इस खास दस्ते की जरूरत?

हाल के महीनों में देखा गया है कि आतंकी सुरक्षा बलों से बचने के लिए घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों की गुफाओं का सहारा ले रहे हैं।

छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare): आतंकी पहाड़ियों से छिपकर हमला करते हैं। स्नो लेपर्ड्स अब उन्हीं की भाषा में उन्हें जवाब देंगे।

तेजी से रिस्पांस: इस दस्ते को ऐसी ट्रेनिंग मिली है कि वे सूचना मिलने के कुछ ही मिनटों के भीतर दुर्गम स्थानों पर एयरलिफ्ट या पैदल पहुँच सकते हैं।

स्थानीय पहचान: इस टीम में उन जवानों को प्राथमिकता दी गई है जो कश्मीर के पहाड़ी इलाकों और रास्तों से भली-भांति वाकिफ हैं।

आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस'

जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि 'स्नो लेपर्ड्स' के आने से हाइब्रिड आतंकियों और विदेशी घुसपैठियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकेगा। यह दस्ता अब एलओसी (LoC) के आसपास के उन इलाकों में भी गश्त करेगा जहाँ सर्दियों में बर्फबारी की वजह से निगरानी कमजोर हो जाती थी।