डूबते पाकिस्तान को फिर मिला IMF का सहारा, लेकिन कब तक चलेगा यह 'डांट और लोन' का खेल?

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कभी डांट, तो कभी दुलार... कुछ ऐसा ही रिश्ता बन गया है दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान और दुनिया के सबसे बड़े 'साहूकार', यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का। अभी कुछ ही दिन पहले जिस IMF ने पाकिस्तान को झूठे आंकड़े दिखाने पर बुरी तरह फटकार लगाई थी, आज वही IMF उसकी डूबती नैया को बचाने के लिए फिर से आगे आया है।

'डांट' के बाद अब मिला 10,600 करोड़ का 'लोन'!

पाकिस्तान और IMF के बीच एक बार फिर से 'स्टाफ लेवल एग्रीमेंट' हो गया है। आसान भाषा में कहें तो, दोनों के बीच बात बन गई है और अब पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर (करीब 10,600 करोड़ रुपये) का नया लोन मिलने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।

इस समझौते पर अभी IMF के बड़े अधिकारियों की फाइनल मुहर लगनी बाकी है, लेकिन पाकिस्तान के लिए यह खबर किसी संजीवनी से कम नहीं है।

IMF क्यों हुआ पाकिस्तान पर मेहरबान?

IMF की टीम लीडर, ईवा पेत्रोवा का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधार के रास्ते पर है:

  • पाकिस्तान का व्यापार घाटा कम हुआ है, और 14 सालों में पहली बार अधिशेष में रहा है।
  • महंगाई काबू में आ रही है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार भी मज़बूत हुआ है।

IMF को उम्मीद है कि इस नए लोन से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में भरोसा लौटेगा।

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है: पाकिस्तान का 'धोखा'

अब ज़रा सिक्के का दूसरा पहलू भी देख लीजिए। यह वही पाकिस्तान है, जिसने कुछ ही समय पहले IMF को अपने व्यापार के आंकड़ों में हेर-फेर करके धोखा देने की कोशिश की थी।

  • क्या हुआ था? पाकिस्तान ने IMF को झूठी जानकारी दी और अपने आयात-निर्यात के आंकड़े गलत बताए।
  • IMF ने पकड़ी चोरी: जब यह चोरी पकड़ी गई, तो IMF ने नाराज़ होकर पाकिस्तान से न सिर्फ अपनी गलती मानने, बल्कि 11 अरब डॉलर के इस गलत आंकड़े को दुनिया के सामने सार्वजनिक करने के लिए भी कहा।
  • पाकिस्तान ने मानी गलती: हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान के अधिकारियों ने यह गलती मान भी ली!

तो आखिर यह चल क्या रहा है?

एक तरफ पाकिस्तान IMF को धोखा देता है, और दूसरी तरफ वही IMF उसे डूबने से बचाने के लिए और पैसा दे देता है। यह पाकिस्तान की उस मज़बूरी को दिखाता है जो कर्ज़ पर टिकी है, और IMF की उस ज़िम्मेदारी को, जो शायद दुनिया की अर्थव्यवस्था को किसी बड़े संकट से बचाने के लिए ज़रूरी है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या पाकिस्तान इस नए मौके का सही इस्तेमाल कर पाता है, या यह पैसा भी उसकी पुरानी आदतों की भेंट चढ़ जाएगा।