भारत में रह रहीं शेख हसीना की घर वापसी की तैयारी, जानिए क्या हैं उनकी शर्तें
News India Live, Digital Desk: बांग्लादेश की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सवाल गूंज रहा है - क्या पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना वापस अपने देश लौटेंगी? पिछले साल अगस्त में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद से भारत में रह रहीं शेख हसीना ने अपनी वापसी के संकेत तो दिए हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार के सामने कुछ कड़ी शर्तें भी रख दी हैं.
बात यह है कि शेख हसीना राजनीति में वापसी तो करना चाहती हैं, लेकिन अपने हिसाब से. उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे वापस नहीं आएंगी. आइए जानते हैं कि आखिर क्या हैं उनकी ये शर्तें.
पहली शर्त - लोकतंत्र की बहाली: शेख हसीना की सबसे बड़ी और पहली मांग है कि बांग्लादेश में "सहभागितापूर्ण लोकतंत्र" को फिर से स्थापित किया जाए. इसका मतलब है कि देश में ऐसा चुनावी माहौल बनाया जाए, जहां सभी राजनीतिक पार्टियों को बराबरी का मौका मिले.
दूसरी शर्त - पार्टी से बैन हटे: उनकी दूसरी अहम शर्त अपनी पार्टी 'अवामी लीग' पर लगे प्रतिबंध को हटाने की है. आपको बता दें कि मौजूदा सरकार ने अवामी लीग की सभी राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है. हसीना का मानना है कि उनकी पार्टी के बिना देश में कोई भी चुनाव न तो निष्पक्ष हो सकता है और न ही विश्वसनीय.
तीसरी शर्त - निष्पक्ष चुनाव: शेख हसीना ने तीसरी शर्त के तौर पर देश में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी नहीं होगी, तब तक उनकी वापसी का कोई मतलब नहीं है.
भारत से दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने मौजूदा मोहम्मद यूनुस सरकार पर भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्तों को खराब करने का आरोप भी लगाया. हालांकि, उन्होंने मुश्किल समय में शरण देने के लिए भारत सरकार का शुक्रिया भी अदा किया.
आपको याद होगा कि पिछले साल जुलाई-अगस्त में छात्रों के बड़े आंदोलन और हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी, जिसके बाद वे भारत आ गई थीं. उनकी सरकार पर आंदोलन के दौरान बल प्रयोग करने के आरोप हैं और उन पर मुकदमा भी चल रहा है.
अब गेंद पूरी तरह से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पाले में है. देखना यह होगा कि क्या वे शेख हसीना की ये शर्तें मानती हैं या नहीं. अगर ये शर्तें मान ली जाती हैं, तो बांग्लादेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है और शेख हसीना की वापसी से वहां के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं.