शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ेंगी मुश्किलें? POCSO केस में पुलिस का बड़ा एक्शन, नाबालिग का कराया गया मेडिकल
News India Live, Digital Desk: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े बहुचर्चित पॉक्सो (POCSO) एक्ट मामले में अब पुलिस ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज इस हाई-प्रोफाइल केस में सबूत जुटाने के लिए पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड में है। पुलिस ने एक नाबालिग पीड़ित का मेडिकल परीक्षण पूरा करवा लिया है, जबकि दूसरे पीड़ित के बयानों और साक्ष्यों का बारीकी से मिलान किया जा रहा है।
क्राइम सीन का दोबारा मुआयना, खंगाले जा रहे CCTV फुटेज
जांच टीम ने माघ मेला क्षेत्र में स्थित उस कथित घटनास्थल (शिविर) का फिर से निरीक्षण किया है, जहां अनुष्ठान के दौरान घटना होने का दावा किया गया था।
तैयार किया गया नक्शा: पुलिस टीम ने शिविर के उस हिस्से का पूरा भौगोलिक मैप तैयार किया है, ताकि घटना की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
सीसीटीवी और आवाजाही की जांच: शिविर में लोगों की एंट्री, एग्जिट और वहां उपलब्ध सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की सघन जांच की जा रही है।
साधु-संतों और चश्मदीदों से भी होगी पूछताछ
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले की विवेचना अब केवल तकनीकी साक्ष्यों तक सीमित नहीं है। प्रत्यक्षदर्शी और सामाजिक सबूत भी जुटाए जा रहे हैं। जल्द ही शिविर में उस दौरान मौजूद रहे साधु-संतों और अन्य चश्मदीदों से पूछताछ की जा सकती है। इसके अलावा, पीड़ितों के बयान दर्ज करने के लिए पुलिस की एक विशेष टीम हाल ही में हरदोई भी गई थी। पुरानी गवाही और नई मेडिकल रिपोर्ट का आपस में गहराई से मिलान किया जा रहा है।
क्या है एफआईआर (FIR) का पूरा सच?
यह मामला तब दर्ज हुआ जब शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने विशेष पॉक्सो अदालत के सामने दो नाबालिगों को पेश कर उनके बयान दर्ज कराए। इसी आधार पर कोर्ट ने झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में दर्ज की गई है। इसमें मुख्य रूप से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
गिरफ्तारी का खतरा, अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल
एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। संभावित पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए उनकी तरफ से अदालत में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी दाखिल कर दी गई है। अब सभी की निगाहें मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस की अगली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।