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April 22 2026 11:24 pm

घड़ी में सेट कर लें अलार्म! दिवाली पर सिर्फ ये 70 मिनट खोलेंगे आपकी क़िस्मत के दरवाज़े

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दिवाली! नाम सुनते ही मन दीयों की जगमगाहट, मिठाइयों की खुशबू और खुशियों की रौनक से भर जाता है। यह हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है, जिसकी तैयारियां हम हफ़्तों पहले से शुरू कर देते हैं। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व इस साल 20 अक्टूबर, 2025, सोमवार को पड़ रहा है।

हम सब इस दिन घर को सजाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, और खूब सारे पकवान बनाते हैं। लेकिन दिवाली की आत्मा बसती है रात में होने वाली माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में। इस पूजा का एक खास समय होता है, जिसे शास्त्रों में सबसे शक्तिशाली और चमत्कारी माना गया है।

क्या आप जानते हैं कि वो कौन सा समय है, जब माँ लक्ष्मी खुद धरती पर घूमने निकलती हैं और अपने भक्तों के घरों में वास करती हैं?

यह सुनहरा समय है 'प्रदोष काल'

आखिर यह 'प्रदोष काल' है क्या?

सीधी और सरल भाषा में, सूर्यास्त के ठीक बाद के लगभग 2 घंटे का समय प्रदोष काल कहलाता है। यह वो जादुई पहर है, जब दिन खत्म हो रहा होता है और रात शुरू हो रही होती है। माना जाता है कि इस संधि काल में ब्रह्मांड की दिव्य ऊर्जाएं सबसे ज़्यादा सक्रिय होती हैं, और इस समय की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।

दिवाली पर क्यों है प्रदोष काल इतना खास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात माँ लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी का भ्रमण करती हैं। प्रदोष काल ही वो समय है जब वे हमारे घरों के सबसे करीब होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति इस समय पूरे विधि-विधान और सच्ची श्रद्धा से माँ लक्ष्मी की पूजा करता है, माँ उसके घर में हमेशा के लिए सुख, समृद्धि और वैभव के साथ बस जाती हैं।

यही वजह है कि दिवाली की रात में लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल को सबसे शुभ और फलदायी माना गया है।

तो इस दिवाली, पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त क्या है? (20 अक्टूबर, 2025)

घड़ी में ये समय नोट कर लीजिए, क्योंकि यही वो पल है जब आपकी क़िस्मत के दरवाज़े खुल सकते हैं:

  • प्रदोष काल का समय: शाम 05:46 से रात 08:18 तक
  • पूजा का सबसे शक्तिशाली और उत्तम मुहूर्त: शाम 07:08 से रात 08:18 तक

इस बार 20 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल और निशीथ काल (मध्यरात्रि), दोनों में रहेगी, इसलिए इसी दिन पूजा करना अत्यंत शुभ है।

एक और ज़रूरी बात: 21 अक्टूबर का महत्व

अगले दिन, यानी 21 अक्टूबर को भी अमावस्या तिथि रहेगी। यह दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन शनिदेव की पूजा करने से शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है।

तो इस दिवाली, सही मुहूर्त में पूजा करके माँ लक्ष्मी को अपने घर बुलाएं और अपने जीवन को सुख-समृद्धि से रोशन करें!