संजय राउत का पीएम मोदी पर तंज – ‘दिल्ली में बाहरी आते हैं और चले जाते हैं’

Sanjay Raut 1740113449055 174011

उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बिना नाम लिए तीखा तंज कसा है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “दिल्ली में बाहरी लोग आते हैं, राज करते हैं और फिर लौट जाते हैं।”

‘जो आज दिल्ली पर शासन कर रहे हैं, उन्हें भी वापस जाना होगा’

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति दिल्ली में स्थायी रूप से शासन करने नहीं आ सकता। उन्होंने कहा,
“दिल्ली परिवर्तन का शहर है। बाहरी लोग यहां आते हैं, शासन करते हैं और फिर वापस लौट जाते हैं। जो लोग आज दिल्ली पर राज कर रहे हैं, उन्हें भी एक दिन लौटना होगा। कुछ राजस्थान लौट गए, कुछ महाराष्ट्र और कुछ गुजरात लौट जाएंगे।”

शरद पवार की जमकर तारीफ

संजय राउत ने इस दौरान एनसीपी (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र के लोग शरद पवार को दिल्ली में देखना चाहते हैं। वह हमारे मार्गदर्शक और नेता हैं।”

राउत ने मराठा सेनापति महादजी शिंदे का जिक्र करते हुए कहा कि “महादजी शिंदे दिल्ली में किंगमेकर थे, उन्होंने दो बार विजय प्राप्त कर शासकों की नियुक्ति की।” राउत ने कहा कि दिल्ली में षड्यंत्र और विश्वासघात राजनीति का हिस्सा हैं।

बिहार: परीक्षा में नकल नहीं कराई, बाहर निकलते ही छात्र की गोली मारकर हत्या

संजय राउत का यू-टर्न? पहले किया था शरद पवार का विरोध

राउत की ओर से शरद पवार की तारीफ करना दिलचस्प है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही शरद पवार ने एकनाथ शिंदे को सम्मानित किया था, जिससे उद्धव गुट नाराज हो गया था।

तब संजय राउत ने कहा था, “सबको पता है कि ऐसे पुरस्कार कैसे खरीदे और बेचे जाते हैं।” लेकिन अब उन्होंने शरद पवार की प्रशंसा कर नया राजनीतिक संदेश दिया है।

एकनाथ शिंदे को ‘महादजी शिंदे पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था

पिछले दिनों एकनाथ शिंदे को पुणे के एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से ‘महादजी शिंदे पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।
शिंदे ने 2022 में उद्धव ठाकरे की सरकार गिराकर बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल ली थी। इसके बाद शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह भी उनके पास चला गया, जबकि उद्धव ठाकरे गुट को एक नया नाम मिला।

पवार ने भी याद किए पुराने दिन

इस मौके पर शरद पवार ने 1962-63 में अपनी पहली दिल्ली यात्रा को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे वह और उनके कुछ साथी पहली बार जवाहरलाल नेहरू को देखकर अचंभित रह गए थे।

संजय राउत के इस बयान को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी, शिवसेना (उद्धव गुट) और कांग्रेस के बीच समीकरण लगातार बदल रहे हैं।