BREAKING:
April 14 2026 03:59 pm

रामपुर में इंसानियत शर्मसार प्यास बुझाने गए सफाई कर्मियों को पानी की जगह मिला जहर

Post

News India Live, Digital Desk : हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि "प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य का काम होता है।" हमारे संस्कार हमें सिखाते हैं कि अगर दुश्मन भी पानी मांगे, तो उसे मना नहीं करना चाहिए। लेकिन उत्तर प्रदेश के रामपुर (Rampur) से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इन सारे संस्कारों और इंसानियत को शर्मसार करके रख दिया है।

सोचिए, आप कड़ी धूप में काम कर रहे हों, गला सूखा हो और आप किसी दुकान पर पानी मांगें। और सामने वाला आपको पानी की जगह तेजाब (Acid) की बोतल थमा दे! सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं न? लेकिन रामपुर में दो सफाई कर्मचारियों के साथ यही हुआ है।

आइए, आसान भाषा में जानते हैं इस खौफनाक घटना की पूरी सच्चाई।

पानी मांगा, मिला तेजाब

मामला रामपुर के मिलक इलाके का है। वहां सलीम और उसका एक साथी धर्मेंद्र नगर पालिका के सफाई कर्मचारी हैं। वे अपनी ड्यूटी कर रहे थे। काम करते-करते उन्हें जोरों की प्यास लगी। पास ही एक परचून (किराना) की दुकान थी।

दोनों दुकान पर गए और वहां बैठी दुकानदार की पत्नी से पीने के लिए पानी मांगा। आरोप है कि महिला ने अंदर से एक बोतल लाकर उन्हें दी। जैसे ही उन प्यासे मजदूरों ने ढक्कन खोला और बोतल मुंह से लगाकर गट-गट पानी पिया, उनके होश उड़ गए।
वह पानी नहीं था। वह तेजाब था!

गला जलने लगा, जमीन पर गिरने लगे

जैसे ही वो लिक्विड उनके गले से नीचे उतरा, उन्हें भयंकर जलन होने लगी। उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वे वहीं तड़पने लगे। मुंह और गला जलने लगा और उनकी तबीयत एकदम से बिगड़ गई।

आसपास के लोग तुरंत उन्हें दौड़कर अस्पताल ले गए, जहाँ उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। डॉक्टरों ने बताया है कि पेट के अंदर काफी नुकसान पहुंचा है।

गलती थी या साजिश?

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ एक "गलती" थी या जानबूझकर की गई क्रूरता?
दुकानदार पक्ष का कहना हो सकता है कि गलती से पानी की बोतल में एसिड रखा होगा, जो दे दिया गया। लेकिन लोगों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि आखिर पीने के पानी और तेजाब में फर्क कैसे नहीं पता चला?

इस घटना के बाद वाल्मीकि समाज और सफाई कर्मचारी संघ में जबरदस्त आक्रोश है। उन्होंने थाने का घेराव किया और महिला के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है कि आखिर महिला ने ऐसा क्यों किया।

इंसानियत कहाँ गई?

दोस्तों, यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस समाज में जी रहे हैं। जो सफाई कर्मी हमारे शहर को साफ़ रखते हैं, गंदगी उठाते हैं, क्या वो "साफ़ पानी" के भी हकदार नहीं हैं? चाहे यह लापरवाही हो या नफरत, दोनों ही सूरत में यह एक अक्षम्य अपराध है।