अमेरिकी राजनीति में समोसा कॉकस का बढ़ा दबदबा, ज़ोहरान ममदानी की जीत से कैसे और मज़बूत हुआ यह देसी गुट?

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News India Live, Digital Desk: न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद पर ज़ोहरान ममदानी की ऐतिहासिक जीत के बाद से ही अमेरिकी राजनीति में एक खास शब्द की चर्चा ज़ोर पकड़ रही है - "समोसा कॉकस" (Samosa Caucus). नाम सुनने में बड़ा दिलचस्प और 'देसी' लगता है, है न? तो आखिर क्या है यह 'समोसा कॉकस' और क्यों अमेरिका के बड़े-बड़े नेता इस गुट से जुड़ने के लिए उत्सुक रहते हैं? चलिए, जानते हैं इस मज़ेदार नाम के पीछे की गंभीर राजनीति.

क्या है यह 'समोसा कॉकस'?

यह कोई आधिकारिक या रजिस्टर्ड संगठन नहीं है, बल्कि अमेरिकी कांग्रेस (वहां की संसद) में काम करने वाले भारतीय मूल के सांसदों और नेताओं के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अनौपचारिक और मज़ाकिया नाम है. इस शब्द को पहली बार साल 2013 में भारतीय-अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने गढ़ा था. 'कॉकस' का मतलब होता है एक विचारधारा वाले लोगों का गुट, और 'समोसा' शब्द इस गुट के भारतीय कनेक्शन को मज़ेदार अंदाज़ में दिखाता है.

शुरुआत में इसमें सिर्फ मुट्ठी भर सदस्य थे, लेकिन पिछले एक दशक में अमेरिका की राजनीति में भारतीय-अमेरिकी नेताओं की संख्या इतनी तेज़ी से बढ़ी है कि अब यह 'समोसा कॉकस' अमेरिकी संसद में एक ताकतवर आवाज़ बन चुका है.

कौन-कौन हैं इस 'देसी' गैंग के बड़े चेहरे?

इस कॉकस के सबसे प्रमुख चेहरों में वो पांच भारतीय-अमेरिकी शामिल हैं जो अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के सदस्य हैं:

  • अमी बेरा (Ami Bera)
  • प्रमिला जयपाल (Pramila Jayapal)
  • राजा कृष्णमूर्ति (Raja Krishnamoorthi)
  • रो खन्ना (Ro Khanna)
  • श्री थानेदार (Shri Thanedar)

इन पांचों के अलावा, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस (Kamala Harris), जिनकी माँ भारतीय थीं, को भी इस कॉकस का एक मानद और सबसे ताकतवर सदस्य माना जाता है.

ज़ोहरान ममदानी की जीत से कैसे मिली और मज़बूती?

न्यूयॉर्क जैसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली शहरों में से एक के मेयर पद पर भारतीय-अमेरिकी ज़ोहरान ममदानी का चुना जाना 'समोसा कॉकस' के बढ़ते प्रभाव का सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण है. उनकी यह जीत दिखाती है कि अब भारतीय मूल के नेता सिर्फ संसद तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ज़मीनी स्तर पर, राज्यों और शहरों की राजनीति में भी अपनी धाक जमा रहे हैं.

ज़ोहरान की जीत ने इस अनौपचारिक गुट के कद को और ऊंचा कर दिया है. यह जीत अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय-अमेरिकियों के लिए एक प्रेरणा है और यह भी एक संदेश है कि अब अमेरिका की राजनीति में उनकी आवाज़ को और ज़्यादा गंभीरता से लेना होगा. यह 'स-से-समोसा और स-से-सफलता' की एक ऐसी कहानी है, जिस पर हर भारतवंशी को गर्व हो सकता है.