रोबोट करेंगे आपके दिमाग की सर्जरी डरें नहीं, ये नई टेक्नोलॉजी व्हीलचेयर पर बैठे लोगों को देगी नई आज़ादी
News India Live, Digital Desk : साल 2026 की पहली सुबह हम सब भविष्य की ओर देख रहे हैं। पिछले कुछ सालों में एलन मस्क ने 'न्यूरालिंक' के बारे में जो बातें की थीं, वे अब सच साबित होती दिख रही हैं। खबर है कि इस साल यानी 2026 से न्यूरालिंक अपनी 'ब्रेन चिप' (Brain Chip) का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करने जा रहा है।
लेकिन यह चिप आखिर करेगी क्या? इसका सबसे भावुक और बड़ा असर उन लोगों पर होगा जो 'लकवे' या 'पक्षाघात' (Paralysis) के कारण हिल-डुल नहीं पाते।
लकवा अब मजबूरी नहीं रहेगा?
न्यूरालिंक का मुख्य लक्ष्य उन लोगों को दोबारा ताकत देना है जिन्होंने किसी दुर्घटना या बीमारी के कारण अपने अंगों पर कंट्रोल खो दिया है। यह छोटी सी चिप सीधे दिमाग की उन नसों (Neurons) से जुड़ती है जो हाथ-पैरों को संकेत देती हैं। सोचिए, एक इंसान जो चल नहीं सकता, वह केवल 'सोचकर' अपनी व्हीलचेयर या कंप्यूटर के माउस को कंट्रोल कर पाएगा। मस्क का दावा तो यहाँ तक है कि भविष्य में यह तकनीक लोगों को दोबारा चलने में भी मदद कर सकती है।
इंसान नहीं, रोबोट करेंगे ये सर्जरी
अक्सर लोग दिमाग की सर्जरी के नाम से डर जाते हैं। लेकिन न्यूरालिंक ने इसके लिए एक खास रोबोट तैयार किया है। यह रोबोट किसी दर्जी की तरह इतनी बारीकी से चिप के बालों जैसे धागों को दिमाग में जोड़ता है, जिसे इंसान शायद ही इतनी सफाई से कर पाएं। एलन मस्क का कहना है कि यह सर्जरी आने वाले समय में इतनी ही आसान और कॉमन हो जाएगी जैसे आज 'लेसिक आई सर्जरी' (चश्मा हटाने का ऑपरेशन) होती है।
क्या यह सुरक्षित है?
आज यानी 2026 के दौर में तकनीक इतनी तेज़ है, फिर भी लोगों के मन में डर ज़रूर है। दिमाग में कुछ चिपका देना थोड़ा सुनने में अजीब लगता है। लेकिन जो लोग अपनी पूरी जिंदगी एक ही बिस्तर पर गुजार देते हैं, उनके लिए यह डर शायद एक नई आज़ादी की कीमत के बराबर है। कंपनी का कहना है कि वे धीरे-धीरे बड़े स्तर पर इसके ट्रायल पूरे कर चुके हैं और अब यह चिप इंसानों के साथ घुलने-मिलने के लिए तैयार है।
भविष्य की एक झलक
न्यूरालिंक सिर्फ लकवे का इलाज नहीं है, बल्कि यह भविष्य की ओर बढ़ता वो कदम है जहाँ इंसान और मशीन एक हो जाएंगे। क्या पता, आने वाले कुछ सालों में आपको टाइप करने के लिए कीबोर्ड की ज़रूरत ही न पड़े और आपका स्मार्टफोन सिर्फ़ आपके सोचने भर से खुल जाए?
यह डरावना लग सकता है, लेकिन रोमांचक भी है। फिलहाल, 2026 में हमारा फोकस उन करोड़ों चेहरों की मुस्कान पर होना चाहिए, जो शायद सालों बाद अपने मोबाइल पर एक छोटा सा मैसेज अपने आप 'सोचकर' टाइप कर पाएंगे।