RIMS रांची में डॉक्टरों की आर-पार की जंग 6 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान, ठप हो सकती हैं स्वास्थ्य सेवाएं
News India Live, Digital Desk: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में स्वास्थ्य सेवाओं पर काले बादल मंडराने लगे हैं। रिम्स के डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) और फैकल्टी मेंबर्स ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 6 अप्रैल से वे पूर्ण रूप से काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इस चेतावनी ने न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि राज्य सरकार की भी नींद उड़ा दी है, क्योंकि रिम्स पर पूरे झारखंड और पड़ोसी राज्यों के मरीजों का भार रहता है।
किन मांगों पर अड़े हैं रिम्स के डॉक्टर?
डॉक्टरों की इस नाराजगी की मुख्य वजह लंबे समय से लंबित प्रमोशन, एरियर का भुगतान और सातवें वेतनमान की विसंगतियों को दूर करना है। डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन सरकार और प्रबंधन की ओर से केवल आश्वासन मिल रहे हैं। अब डॉक्टरों ने 'करो या मरो' की स्थिति अपना ली है। उनका कहना है कि काम का भारी दबाव होने के बावजूद उन्हें उनके जायज हक से वंचित रखा जा रहा है, जो अब बर्दाश्त से बाहर है।
6 अप्रैल से मरीज हो सकते हैं बेहाल
अगर 6 अप्रैल से डॉक्टर हड़ताल पर जाते हैं, तो रिम्स की ओपीडी (OPD), इमरजेंसी सेवाएं और रूटीन सर्जरी पूरी तरह ठप हो सकती हैं। रिम्स में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। डॉक्टरों के इस सामूहिक अवकाश और हड़ताल के ऐलान से उन गरीब मरीजों के सामने जीवन-मरण का संकट खड़ा हो जाएगा जो निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते। हालांकि, एसोसिएशन ने कहा है कि वे हड़ताल नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार उन्हें इसके लिए मजबूर कर रही है।
सरकार और प्रशासन के बीच सुलह की कोशिशें तेज
हड़ताल की धमकी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और रिम्स निदेशक हरकत में आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार, डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जा सकती है ताकि हड़ताल को टाला जा सके। रिम्स प्रबंधन का प्रयास है कि 6 अप्रैल से पहले बीच का कोई रास्ता निकल आए। वहीं, आम जनता की नजरें भी सरकार के रुख पर टिकी हैं, क्योंकि रिम्स जैसी संस्था में हड़ताल होने का मतलब है झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का चरमरा जाना।