संतान सुख की है चाहत? सावन पुत्रदा एकादशी पर इस अचूक विधि से करें पूजा, भूलकर भी न करें ये गलतियां

संतान सुख की है चाहत? सावन पुत्रदा एकादशी पर इस अचूक विधि से करें पूजा, भूलकर भी न करें ये गलतियां

सनातन धर्म में सावन के महीने में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी का एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, जिसे 'सावन पुत्रदा एकादशी' के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो महिलाएं या दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं या जिनकी संतान के जीवन में लगातार परेशानियां आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं माना जाता। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना करने से न सिर्फ योग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल्कि घर में धन, धान्य और सुख-समृद्धि का भी वास हमेशा बना रहता है। सावन का महीना होने के कारण इस दिन भगवान शिव की कृपा भी भक्तों को सहज ही प्राप्त हो जाती है।

इस सरल और अचूक विधि से करें पूजा: पूरी होगी हर मनोकामना

पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा की शुरुआत सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर करनी चाहिए। सबसे पहले अपने घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल से पवित्र करें। इसके बाद भगवान को पीले वस्त्र, पीले फूल, तुलसी दल, अक्षत और पीला चंदन अर्पित करें। संतान गोपाल मंत्र का जाप करना इस दिन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। दोपहर या शाम के समय पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा का श्रवण अवश्य करें और अंत में आरती कर भगवान को ऋतु फल या सात्विक मिठाई का भोग लगाएं। याद रखें कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का होना अनिवार्य है, क्योंकि इसके बिना वे भोग स्वीकार नहीं करते।

भूलकर भी न करें ये गलतियां: नोट कर लें 'क्या करें और क्या न करें' की पूरी लिस्ट

एकादशी व्रत के नियम बेहद कड़े और अनुशासन प्रिय होते हैं, इसलिए इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में एकादशी पर चावल खाना पूरी तरह वर्जित बताया गया है। इसके अलावा घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें, लहसुन-प्याज या तामसिक भोजन न बनाएं और किसी भी व्यक्ति के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करने से बचें। एकादशी के दिन पेड़-पौधों से पत्तियां या फूल तोड़ना भी अशुभ माना जाता है। इस दिन जो काम अवश्य करने चाहिए, उनमें जरूरतमंदों को पीले अनाज या वस्त्रों का दान देना, रात्रि जागरण करना और भगवान के नाम का कीर्तन करना सबसे प्रमुख माना जाता है।

देश भर के प्रमुख मंदिरों में विशेष तैयारियां: लखनऊ और यूपी के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या और मथुरा सहित देश भर के प्रमुख विष्णु और कृष्ण मंदिरों में सावन पुत्रदा एकादशी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार पूजा के दौरान बेहद शुभ और दुर्लभ योग बन रहे हैं, जिससे व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है। व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में ही किया जाना चाहिए। लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर और खाटू श्याम मंदिर के आसपास भी इस दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है, जहाँ लोग संतान के स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की प्रार्थना करने के लिए विशेष अनुष्ठान करवा रहे हैं।

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