सावन के अंतिम मंगला गौरी व्रत पर भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए करें ये 3 अचूक उपाय

सावन के अंतिम मंगला गौरी व्रत पर भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए करें ये 3 अचूक उपाय

सावन के पावन महीने में जिस तरह सोमवार का दिन भगवान शिव की भक्ति के लिए समर्पित होता है, उसी तरह प्रत्येक मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत (Mangla Gauri Vrat) माता पार्वती (मां मंगला गौरी) की विशेष कृपा पाने का महापर्व माना जाता है। सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं दोनों के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से वैवाहिक जीवन के सभी संकट दूर होते हैं, कुंडली का मांगलिक दोष शांत होता है और अखंड सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि, अंतिम व्रत के दिन की गई छोटी-सी लापरवाही पूजा के संपूर्ण फल को निष्फल कर सकती है।

सावन के अंतिम मंगला गौरी व्रत पर भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां

अंतिम व्रत पर विशेष सावधानी बरतते हुए इन वर्जित कार्यों से बचना चाहिए:

  • 1. काले या सफेद वस्त्र न पहनें: माता गौरी की पूजा में काले, नीले या भूरे रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। पूजा के दौरान लाल, पीले, गुलाबी या नारंगी रंग के पारंपरिक वस्त्र ही धारण करें।

  • 2. संख्या 16 के नियम की अनदेखी: मंगला गौरी व्रत में '16' की संख्या का विशेष महत्व होता है। भोग (16 लड्डू या पूरियां), दीपक की 16 बत्तियां, 16 फल और 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने का विधान है। सामग्री की गिनती में लापरवाही न बरतें।

  • 3. क्रोध, कलह और बाल खुले रखने से बचें: सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने बाल खुले रखकर पूजा न करें और न ही दिन में सोएं। घर में किसी भी प्रकार का वाद-विवाद, कटु वचन या सास-ससुर का अनादर करने से व्रत का पुण्य समाप्त हो जाता है।

  • 4. अन्न और तामसिक भोजन का सेवन: व्रतधारी को फलाहार ही करना चाहिए। भोजन में लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा या भारी नमक का इस्तेमाल परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस दिन नहीं करना चाहिए।

अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख के लिए करें ये 3 अचूक उपाय

यदि वैवाहिक जीवन में तनाव, पति-पत्नी में अनबन या विवाह में देरी जैसी समस्याएं आ रही हैं, तो अंतिम मंगला गौरी व्रत पर ये 3 उपाय अवश्य करें:

  • 1. मां गौरी को 16 श्रृंगार और सिंदूर अर्पित करें: पूजा के समय माता गौरी को लाल चुनरी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां और मेंहदी सहित 16 श्रृंगार की संपूर्ण सामग्री अर्पित करें। पूजा संपन्न होने के बाद उस सिंदूर से अपनी मांग भरें और थोड़ा सिंदूर किसी सौभाग्यवती सुहागिन स्त्री को दान करें। इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम और पति की लंबी आयु का वरदान मिलता है।

  • 2. 16 बत्तियों वाले आटे के दीपक से आरती: आटे का एक बड़ा चौमुखी या विशेष दीपक बनाएं, जिसमें शुद्ध घी और कलावे की 16 बत्तियां लगाई जाएं। मां मंगला गौरी की आरती 16 बत्तियों वाले दीपक से करने पर घर की नकारात्मक ऊर्जा, गृह क्लेश और दरिद्रता का समूल नाश होता है।

  • 3. मांगलिक दोष शांति के लिए मसूर दाल और लाल वस्त्र का दान: जिन कन्याओं या युवकों के विवाह में कुंडली के मांगलिक दोष के कारण अड़चनें आ रही हैं, वे इस दिन एक लाल कपड़े में सवा किलो लाल मसूर की दाल, लाल फूल और तांबे का सिक्का बांधकर माता पार्वती और भगवान शिव के चरणों में स्पर्श कराएं और फिर किसी जरूरतमंद या मंदिर में दान करें।

सावन के अंतिम मंगला गौरी व्रत पर श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध अंतःकरण से की गई माता पार्वती की आराधना से दांपत्य जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति सुनिश्चित होती है।

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