Raksha Bandhan 2026: काली से लेकर भगवान की फोटो वाली... राखी के डिजाइन का होता है गहरा असर; जानिए कौन सी राखी शुभ और कौन सी अशुभ?
भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का महापर्व रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उन्नति की कामना करते हुए उसकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं। बाजार में इन दिनों डिजाइनर, फैंसी, कार्टून, प्लास्टिक और मेटल से बनी अनगिनत तरह की राखियां उपलब्ध हैं।
हालांकि, ज्योतिष और सनातन शास्त्रों के अनुसार, राखी केवल सजावट की वस्तु नहीं बल्कि एक पवित्र वैदिक रक्षासूत्र है। गलत रंग, अशुभ प्रतीक या अनुचित डिजाइन वाली राखी बांधने से भाई के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कैसी राखी बांधना माना जाता है अत्यंत अशुभ?
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काले रंग की राखी (Black Thread): ज्योतिष शास्त्र में काले रंग को नकारात्मक ऊर्जा और तामसिकता का प्रतीक माना जाता है। किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य में काले धागे या काले मोतियों वाली राखी बांधने की सख्त मनाही है। यह भाई के जीवन में तनाव और कलह ला सकती है।
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भगवान की तस्वीरों वाली राखी (God's Idol or Picture): आजकल भगवान गणेश, श्रीकृष्ण, शिवजी या हनुमान जी की छोटी मूर्तियों और तस्वीरों वाली राखियां काफी चलन में हैं। शास्त्रों के अनुसार, हाथ की कलाई पर बंधी राखी दिनचर्या के दौरान हाथ धोने, खाना खाने या सोने के समय अपवित्र हो जाती है और कुछ समय बाद टूटकर गिर जाती है। इससे भगवान का अपमान और दोष लगता है।
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अशुभ और नुकीले चिन्हों वाली राखी: कई फैंसी राखियों पर तलवार, चाकू, कंकाल, क्रॉस या नुकीले मेटल लगे होते हैं। ऐसे हिंसक और तीखे चिन्ह भाई के स्वभाव में उग्रता, क्रोध और दुर्घटना के योग को बढ़ावा देते हैं।
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टूटी या खंडित राखी: भूलकर भी ऐसी राखी न खरीदें जिसका धागा उधड़ा हुआ हो, मोती बिखरे हों या कोई सिंबल टूटा हुआ हो। खंडित वस्तु को बांधना शास्त्रों में वर्जित है।
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प्लास्टिक और सिंथेटिक मटीरियल: प्लास्टिक अशुद्ध माना जाता है। पूरी तरह से प्लास्टिक से बनी राखियों के बजाय पारंपरिक प्राकृतिक तत्वों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कौन सी राखी मानी जाती है सबसे शुभ और फलदायी?
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रेशम, सूत या कलावा (मौली) की राखी: पारंपरिक लाल, पीला और नारंगी रंग का कलावा (मौली) या शुद्ध रेशम का धागा सबसे पवित्र रक्षासूत्र माना जाता है। यह त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और त्रि-देवियों के आशीर्वाद का प्रतीक है।
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शुभ वैदिक प्रतीक (स्वस्तिक, ॐ, कलश): यदि राखी पर कोई आकृति बनी हो, तो ध्यान रखें कि वह स्वस्तिक, ॐ (Om), त्रिशूल, रुद्राक्ष या कलश का प्रतीक हो। यह भाई के जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा चक्र बनाती है।
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चांदी और सोने की राखी: चांदी को चंद्रमा का और सोने को सूर्य व गुरु का कारक माना गया है। चांदी की राखी बांधने से मन शांत रहता है और मानसिक तनाव दूर होता है।
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चंदन और रुद्राक्ष वाली राखी: असली रुद्राक्ष या चंदन की लकड़ी से बनी राखी भाई की कलाई पर बांधने से नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी नजर और रोगों से रक्षा होती है।
राखी बांधते समय रखें दिशा और मंत्र का ध्यान
रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र बांधते समय भाई का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। राखी बांधने से पहले थाली में अक्षत, रोली, चंदन, दीपक और मिठाई जरूर सजाएं। तिलक लगाने के बाद सिर पर रुमाल या टोपी रखकर ही रक्षासूत्र बांधें और रक्षा सूत्र का पौराणिक मंत्र अवश्य बोलें:
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥