18 अगस्त 2026 का पंचांग: सावन के मंगलवार पर कल्कि जयंती और मंगला गौरी व्रत का दुर्लभ महासंयोग! जानिए अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और संपूर्ण पूजा का समय

18 अगस्त 2026 का पंचांग: सावन के मंगलवार पर कल्कि जयंती और मंगला गौरी व्रत का दुर्लभ महासंयोग! जानिए अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और संपूर्ण पूजा का समय

पवित्र श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी आज, 18 अगस्त 2026 का दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत पावन और दुर्लभ संयोग लेकर आया है। मंगलवार का दिन होने के कारण जहां एक ओर सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं अखंड सौभाग्य और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए सावन का 'मंगला गौरी व्रत' कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कलयुग के अंधकार को समाप्त कर धर्म की पुनर्स्थापना करने वाले भगवान श्रीहरि विष्णु के दसवें अवतार 'कल्कि जयंती' का महापर्व भी आज ही मनाया जा रहा है। किसी भी मांगलिक कार्य, नवीन शुरुआत, पूजा-पाठ और यात्रा की सफलता के लिए सही समय और ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूलता देखना बेहद जरूरी होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार आज के दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल, शुभ चौघड़िया, राहुकाल का समय और देवी गौरी व भगवान कल्कि की कृपा पाने के विशेष नियम विस्तार से जाने जा सकते हैं।

18 अगस्त 2026 का संपूर्ण दैनिक पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग और करण

वैदिक काल-गणना के अनुसार आज के पंचांगीय घटक इस प्रकार हैं:

  • विक्रम संवत: 2083 (कालयुक्त)

  • शक संवत: 1948

  • माह (महीना): श्रावण (सावन), अधिक/शुद्ध: शुद्ध श्रावण मास

  • पक्ष: शुक्ल पक्ष

  • वार (दिन): मंगलवार (Mangalwar)

  • तिथि: षष्ठी तिथि सायं 05:50 बजे तक, इसके बाद सप्तमी तिथि का प्रारंभ होगा।

  • नक्षत्र: चित्रा नक्षत्र दोपहर 01:42 बजे तक, इसके उपरांत स्वाति नक्षत्र का संचरण होगा।

  • योग: शुक्ल योग रात्रि 09:18 बजे तक, इसके बाद ब्रह्म योग सक्रिय रहेगा।

  • करण: कौलव करण प्रातः 06:40 बजे तक, उसके बाद तैतिल करण सायं 05:50 बजे तक, फिर गर करण रहेगा।

  • सूर्योदय: प्रातः 05:52 AM

  • सूर्यास्त: सायं 06:58 PM

  • चंद्रोदय: प्रातः 10:48 AM

  • चंद्रास्त: रात्रि 10:24 PM

  • सूर्य राशि: सिंह राशि (Sun in Leo)

  • चंद्र राशि: तुला राशि (Moon in Libra - दिन-रात)

शुभ मुहूर्त: अभिजीत, विजय और अमृत काल में करें शुभ कार्य

सनातन परंपरा में शुभ मुहूर्तों में किए गए कार्यों में दैवीय कृपा प्राप्त होती है और विघ्न-बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। आज के दिन के सर्वश्रेष्ठ शुभ काल इस प्रकार हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:25 AM से 05:08 AM तक (ईश्वर आराधना, ध्यान और मंत्र जप के लिए सर्वोत्तम समय)।

  • प्रातः संध्या मुहूर्त: प्रातः 04:46 AM से 05:52 AM तक।

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 AM से 12:51 PM तक (दिन का सबसे शक्तिशाली और सर्वकार्य सिद्धि दायक मुहूर्त)।

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:36 PM से 03:28 PM तक (व्यापारिक समझौतों, कानूनी कार्यों और नए प्रोजेक्ट्स के लिए उत्तम)।

  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:58 PM से 07:20 PM तक (संध्या वंदन, दीपदान और मंदिर दर्शन का समय)।

  • सायाह्न संध्या: सायं 06:58 PM से 08:04 PM तक।

  • अमृत काल: प्रातः 07:15 AM से 08:50 AM तक।

  • निशिता मुहूर्त (मध्यरात्रि साधना): रात्रि 12:03 AM से 12:47 AM (19 अगस्त) तक।

अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और भद्रा के समय न करें कोई नया काम

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अशुभ काल में कोई भी नया व्यवसाय, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर या बड़ी खरीदारी करने से बचना चाहिए क्योंकि इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है:

  • राहुकाल (Rahu Kaal): दोपहर 03:39 PM से सायं 05:18 PM तक (राहुकाल के दौरान किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत पूरी तरह वर्जित मानी गई है)।

  • यमगंड: प्रातः 09:08 AM से 10:46 AM तक।

  • गुलिक काल: दोपहर 12:25 PM से 02:02 PM तक।

  • दुर्मुहूर्त: प्रातः 08:29 AM से 09:21 AM तक तथा रात्रि 11:18 PM से 12:03 AM तक।

  • दिशाशूल: मंगलवार को 'उत्तर दिशा' में दिशाशूल रहता है। अतः आज उत्तर दिशा की लंबी यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अत्यंत आवश्यक हो, तो घर से निकलने से पहले गुड़ खाकर और थोड़ा पानी पीकर ही प्रस्थान करें।

दिन का शुभ चौघड़िया: यात्रा और व्यापारिक फैसलों के लिए श्रेष्ठ समय

  • चर (सामान्य): प्रातः 09:08 AM से 10:46 AM तक

  • लाभ (उन्नति): प्रातः 10:46 AM से दोपहर 12:25 PM तक

  • अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 12:25 PM से 02:02 PM तक

  • शुभ (कल्याणकारी): दोपहर 03:39 PM से सायं 05:18 PM तक

कल्कि जयंती और मंगला गौरी व्रत का दुर्लभ आध्यात्मिक महत्व

आज का दिन दोहरी ईश्वरीय शक्तियों की साधना का दिन है। एक तरफ श्रावण मास का मंगलवार होने से मां पार्वती के मंगलमयी स्वरूप 'मां मंगला गौरी' का व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि जो महिलाएं सावन के मंगलवार को श्रद्धापूर्वक मां गौरी का 16 श्रृंगार की सामग्रियों के साथ पूजन करती हैं, उनके दांपत्य जीवन के समस्त क्लेश दूर होते हैं, कुंडली में मौजूद मांगलिक दोष शांत होता है और पति को दीर्घायु प्राप्त होती है।

वहीं दूसरी ओर, श्रावण शुक्ल षष्ठी को 'कल्कि जयंती' मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार, कलयुग के अंत में जब अधर्म अपनी पराकाष्ठा पर होगा, तब भगवान विष्णु उत्तर प्रदेश के संभल में 'कल्कि' रूप में अवतरित होंगे। आज के दिन भगवान विष्णु के कल्कि स्वरूप का ध्यान करने से व्यक्ति के समस्त ज्ञात-अज्ञात पाप, मानसिक विकार और जीवन में आने वाले संकट समाप्त हो जाते हैं।

मां मंगला गौरी और भगवान कल्कि की संपूर्ण पूजन विधि

प्रातः काल स्नान और संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय उठकर स्नान करें। लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर मंगला गौरी व्रत व कल्कि जयंती पूजन का संकल्प लें।

मां मंगला गौरी का षोडशोपचार पूजन: पूजा स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर मां पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। मां मंगला गौरी को 16 की संख्या में वस्तुएं अर्पित की जाती हैं—जैसे 16 सुहाग सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेंहदी आदि), 16 फल, 16 फूल, 16 पान के पत्ते, 16 लौंग और 16 इलायची। इसके बाद आटे का 16 मुखी दीपक बनाकर उसमें शुद्ध घी का दीया प्रज्वलित करें।

कल्कि देव का अभिषेक व अर्चना: एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु/कल्कि देव की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं। पीले चंदन का तिलक लगाएं और तुलसी दल, पीले पुष्प व पीले मिष्ठान का भोग अर्पित करें।

अचूक मंत्र जप: पूजा के समय इन सिद्ध मंत्रों का कम से कम 108 बार रुद्राक्ष या तुलसी की माला से जप करें:

  • मां मंगला गौरी मंत्र: ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

  • भगवान कल्कि मंत्र: ॐ नमो कल्किदेवाय क्लीं नमः अथवा ॐ श्री कल्कि अवताराय नमः

कथा, आरती और दान: मंगला गौरी व्रत कथा और कल्कि अवतार की कथा का श्रवण करें। कपूर से मां गौरी और भगवान विष्णु की आरती उतारें। पूजा के उपरांत किसी जरूरतमंद ब्राह्मण या सुहागिन महिला को अन्न, फल, वस्त्र और दक्षिणा दान करें।

आज के दिन क्या करें और किन गलतियों से बचें?

आज मंगलवार और सावन का पवित्र दिन होने के कारण तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) और मदिरा से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। घर में किसी भी प्रकार का कलह, क्रोध या बुजुर्गों का अनादर न करें। राहुकाल (दोपहर 03:39 से सायं 05:18 बजे) के समय किसी भी महत्वपूर्ण कागजात पर हस्ताक्षर न करें और न ही कोई नया सौदा फाइनल करें। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से आज के दिन मंगल ग्रह के सभी अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और कर्ज मुक्ति के मार्ग खुलते हैं।

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