Hariyali Teej 2026: इस साल हरियाली तीज पर 70 साल बाद बन रहा 3 महायोगों का दुर्लभ संयोग, सुहागिनों को मिलेगा अखंड सौभाग्य का वरदान
सावन के रिमझिम फुहारों के बीच उत्तर भारत से लेकर देश के कोने-कोने में सुहाग और आस्था के महापर्व हरियाली तीज (Hariyali Teej 2026) की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में हरियाली तीज को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखद दांपत्य जीवन का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष 2026 में हरियाली तीज का त्योहार ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद खास और फलदायी माना जा रहा है। पंचांगीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों का ऐसा महासंयोग बन रहा है जो पिछले कई दशकों में नहीं देखा गया। तीन अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली शुभ योगों के बनने से इस दिन की गई शिव-पार्वती की पूजा का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होगा।
हरियाली तीज 2026 की सही तारीख और तृतीया तिथि का समय
पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज की तिथि को लेकर लोगों के मन में संशय रहता है। वैदिक पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि का आरंभ 14 अगस्त 2026 को शाम 06 बजकर 46 मिनट पर हो रहा है। यह तृतीया तिथि अगले दिन यानी 15 अगस्त 2026 को शाम 05 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय व्यापिनी यानी 'उदया तिथि' का सर्वाधिक महत्व होता है। चूंकि 15 अगस्त के सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए देश भर में हरियाली तीज का पावन व्रत और उत्सव 15 अगस्त 2026, शनिवार को ही पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। 15 अगस्त को राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज का यह अद्भुत मेल इस दिन के उत्साह को दोगुना कर रहा है।
इस साल बन रहा 3 महायोगों का दुर्लभ संयोग: शिव, सिद्ध और रवि योग
ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार, वर्ष 2026 की हरियाली तीज पर तीन प्रमुख और कल्याणकारी योगों का निर्माण हो रहा है, जो इसे महिलाओं के लिए वरदान समान बना रहे हैं:
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शिव योग: 15 अगस्त की सुबह 07 बजकर 09 मिनट तक 'शिव योग' रहेगा। भगवान शिव के नाम पर आधारित यह योग आध्यात्मिक साधना, व्रत संकल्प और दांपत्य बाधाओं को दूर करने के लिए अचूक माना जाता है।
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सिद्ध योग: शिव योग के तुरंत बाद 'सिद्ध योग' शुरू होगा, जो 16 अगस्त की सुबह 05 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इस योग में किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और मंत्र जाप स्वतः सिद्ध और सफल माने जाते हैं।
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रवि योग: 15 अगस्त को सूर्योदय के साथ ही पूरे दिन 'रवि योग' का प्रभाव रहेगा। रवि योग समस्त प्रकार के अनिष्टों और अशुभ प्रभावों को भस्म करने वाला माना जाता है।
इसके अलावा ग्रहों की स्थिति की बात करें तो सूर्य, बुध और गुरु के अनुकूल गोचर से बुधादित्य और त्रिग्रही योग का शुभ प्रभाव भी इस दिन पूजा करने वाली महिलाओं के जीवन में खुशहाली लाएगा।
महिलाओं के लिए क्यों है यह व्रत इतना खास? अखंड सौभाग्य और शिव-पार्वती का मिलन
शिव पुराण और स्कंद पुराण की कथाओं के अनुसार, हरियाली तीज का दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के पुनर्मिलन का पावन स्मृति दिवस है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 107 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। अंततः उनके 108वें जन्म में श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन भगवान शिव ने उनकी अनन्य भक्ति और निष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
इसी कारण सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम व सामंजस्य बनाए रखने के लिए यह निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं सुयोग्य, संस्कारवान और मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से माता पार्वती और भगवान शिव का पूजन करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से आराधना करने पर दांपत्य जीवन के हर प्रकार के क्लेश समाप्त हो जाते हैं।
16 श्रृंगार, हरे रंग का महत्व और 'सिंधारा' की पावन परंपरा
हरियाली तीज का त्योहार प्रकृति के सौंदर्य और नारीत्व के उत्सव का संगम है। सावन के महीने में चारों तरफ हरियाली छाई रहती है, जो नवजीवन, सकारात्मक ऊर्जा और उर्वरता का प्रतीक है। यही कारण है कि इस दिन महिलाएं हरे रंग की साड़ियां, हरी चूड़ियां, बिंदी और पारंपरिक परिधान धारण करती हैं।
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हाथों में मेहंदी का गहरा रंग: हरियाली तीज पर महिलाओं के हाथों और पैरों में मेहंदी लगाने की सदियों पुरानी परंपरा है। माना जाता है कि मेहंदी का रंग जितना गहरा चढ़ता है, पति और ससुराल का स्नेह उतना ही अधिक मिलता है।
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मायके से सिंधारा आने की रीत: उत्तर भारत, विशेष रूप से राजस्थान और पश्चिमी यूपी में हरियाली तीज पर नवविवाहिताओं के लिए मायके से 'सिंधारा' (Sindhara) भेजा जाता है। सिंधारे में घेवर, फल, मेवे, हरी साड़ियां, चूड़ियां, सुहाग का सामान और आभूषण शामिल होते हैं।
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झूला झूलना और लोकगीत: गांवों से लेकर शहरों के पार्कों और आंगनों में पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं। महिलाएं और युवतियां मिलकर सावन के कजरी, मल्हार और तीज के पारंपरिक लोकगीत गाते हुए झूला झूलती हैं।
हरियाली तीज 2026 पूजा के सबसे शुभ मुहूर्त और चौघड़िया
15 अगस्त 2026 को दिन भर में पूजन और व्रत अनुष्ठान के लिए कई अत्यंत शुभ चौघड़िया और मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे:
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:50 बजे से 05:35 बजे तक (संकल्प और ध्यान के लिए सर्वोत्तम)
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प्रातः सन्ध्या मुहूर्त: प्रातः 05:12 बजे से 06:19 बजे तक
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शुभ चौघड़िया (उत्तम समय): प्रातः 07:29 बजे से 09:08 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से 01:08 बजे तक (विजय और मनोकामना पूर्ति के लिए)
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लाभ व अमृत चौघड़िया: दोपहर 02:04 बजे से शाम 05:22 बजे तक
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गोधूलि व प्रदोष काल: शाम 07:06 बजे से 07:29 बजे तक (सायंकालीन विशेष आरती के लिए)
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अमृत काल: रात्रि 08:18 बजे से 09:53 बजे तक
घर पर कैसे करें विधि-विधान से शिव-पार्वती पूजन?
हरियाली तीज की पूजा अत्यंत सात्विक और भक्तिभाव से की जाती है। यदि आप घर पर पूजन कर रही हैं, तो इस विधि का पालन करें:
प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और हरे या लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल और पुष्प लेकर भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष व्रत का संकल्प लें। घर के ईशान कोण में एक स्वच्छ चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
शुद्ध काली मिट्टी या बालू रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य श्री गणेश की प्रतिमा तैयार करें। यदि प्रतिमा बनाना संभव न हो, तो शिव-पार्वती के चित्र या शिवलिंग का पूजन कर सकते हैं।
माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें, जिसमें लाल चुनरी, सिंदूर, हरी चूड़ियां, बिंदी, मेंहदी, काजल, पायल और इत्र शामिल हों। भगवान शिव को पंचामृत, गंगाजल से अभिषेक कराएं और बेलपत्र, धतूरा, मदार के पुष्प, भांग और सफेद चंदन अर्पित करें।
भोग में ऋतु फल, मालपुआ और विशेष रूप से सावन का घेवर अर्पित करें। घी का दीपक प्रज्वलित कर हरियाली तीज की पावन व्रत कथा का श्रवण करें। कथा पूर्ण होने के बाद माता पार्वती और भगवान शिव की आरती करें और परिवार के सुख-सौभाग्य की प्रार्थना करें।
मनोकामना पूर्ति के लिए इन शक्तिशाली मंत्रों का करें जाप
पूजा के समय इन सिद्ध मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करने से वैवाहिक जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं:
माता पार्वती का सौभाग्य मंत्र: "ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः" अथवा "हे गौरि शंकरार्धाङ्गि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम्॥"
भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र: "ॐ नमः शिवाय"
हरियाली तीज का यह पावन पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, दांपत्य प्रेम के समर्पण और नारी शक्ति के अटूट विश्वास का उत्सव है। 15 अगस्त 2026 को बन रहे दुर्लभ योगों में की गई आराधना हर महिला के जीवन में खुशियों, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का उजाला भरेगी।