
Donald Trump Tariff: 2 अप्रैल 2025 से अमेरिका ने दुनियाभर के देशों पर नए जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है, जिसका सीधा असर भारत, कनाडा, मैक्सिको और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस फैसले को लेकर काफी समय से सक्रिय थे और अब इसे ‘लिबरेशन डे’ के तौर पर पेश कर रहे हैं।
इस टैरिफ लागू होने से पहले ही इसके असर की गूंज भारतीय शेयर बाजार में भी सुनाई देने लगी है। निवेशक सतर्क हो गए हैं, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल ट्रेड वॉर की आशंका गहराती जा रही है।
व्हाइट हाउस की आधिकारिक पुष्टि – आज से लागू होंगे नए टैरिफ
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि 2 अप्रैल से अमेरिका टैरिफ लागू करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप सरकार का मकसद अमेरिकी कामगारों को समान अवसर और घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में लीविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस विषय पर अपने व्यापारिक सलाहकारों के साथ विस्तृत योजना पर काम कर चुके हैं और आज (2 अप्रैल) शाम 4 बजे (स्थानीय समय) व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में औपचारिक ऐलान करेंगे।
बड़ी अर्थव्यवस्थाएं दबाव में, बातचीत के लिए रास्ते खुले
कैरोलीन लीविट ने इस बात की भी पुष्टि की कि ट्रंप किसी भी विदेशी नेता या उद्योग प्रतिनिधि से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि “अगर कोई छूट की मांग करता है तो हम बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं।” इससे यह साफ है कि कुछ देशों के साथ बातचीत के विकल्प खुले हैं, लेकिन अमेरिका का स्टैंड इस बार बेहद कड़ा है।
वहीं दूसरी ओर, कनाडा, मैक्सिको और भारत जैसे देश इस टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि इन देशों के अमेरिका के साथ बड़े आयात-निर्यात संबंध हैं।
क्या है टैरिफ और यह इतना बड़ा मुद्दा क्यों है?
टैरिफ यानी सीमा शुल्क—सरल भाषा में कहें तो यह एक तरह का टैक्स है जो सरकारें आयात या निर्यात होने वाले उत्पादों और सेवाओं पर लगाती हैं। इसका उद्देश्य देश के घरेलू उद्योगों को बाहर से आने वाले सस्ते उत्पादों से बचाना, राजस्व अर्जित करना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को संतुलित करना होता है।
उदाहरण के लिए, अगर भारत अमेरिका से आने वाले किसी सामान पर 10% आयात शुल्क लगाता है, तो जवाब में अमेरिका भी भारत से आने वाले सामान पर 10% टैरिफ लगा सकता है। इसे ही रिटैलिएटरी टैरिफ (Retaliatory Tariff) कहते हैं।
ग्लोबल ट्रेड वॉर का खतरा क्यों मंडरा रहा है?
- जब कोई बड़ा देश जैसे अमेरिका इस तरह के जवाबी टैरिफ लगाता है, तो दूसरे देश भी पलटवार करते हैं।
- इससे व्यापार महंगा हो जाता है, वस्तुएं उपभोक्ताओं तक महंगे दामों पर पहुंचती हैं।
- डिमांड में गिरावट आती है, जिससे उत्पादन और रोजगार प्रभावित होते हैं।
- मल्टीनेशनल कंपनियों और निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ जाती है।
यही वजह है कि इस टैरिफ के ऐलान के साथ ही दुनियाभर के मार्केट्स और सरकारें सतर्क हो गई हैं।
भारत पर इसका क्या असर हो सकता है?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, खासकर टेक्नोलॉजी, फार्मा, और ऑटोमोबाइल सेक्टर में। अगर अमेरिका भारत से आने वाले प्रोडक्ट्स पर ज्यादा टैरिफ लगाता है, तो इससे भारतीय कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
वहीं, भारतीय निर्यातकों को नए बाज़ार खोजने पड़ सकते हैं और अमेरिकी बाजार में उनका सामान कम प्रतिस्पर्धी हो सकता है। इससे एक्सपोर्ट और जीडीपी ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है।